India-China: भारत में चीन के नए रक्षा अटैची रियर एडमिरल यू जियान ने भारतीय सेना की मानवीय सहायता की खुलकर सराहना की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में केरल तट के पास आग और विस्फोट का शिकार हुए एक मालवाहक जहाज से 12 चीनी चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित बचाने में भारतीय सेना और बचाव एजेंसियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चीन इस सहायता को कभी नहीं भूलेगा और इसे दोनों देशों के बीच भरोसे और सहयोग का महत्वपूर्ण उदाहरण मानता है।

PLA स्थापना दिवस समारोह में दिया बयान
रियर एडमिरल यू जियान ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की स्थापना की 99वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में कही। इस मौके पर उन्होंने भारत और चीन के रिश्तों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दोनों देश एशिया की बड़ी शक्तियां हैं और वर्तमान समय में विकास, आर्थिक प्रगति तथा राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे समय में आपसी सहयोग और संवाद दोनों देशों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

केरल तट पर बचाव अभियान को बताया मानवीय उदाहरण
अपने संबोधन में यू जियान ने विशेष रूप से उस घटना का उल्लेख किया, जब केरल के समुद्री क्षेत्र में एक कार्गो जहाज में आग लगने और विस्फोट के बाद कई लोग संकट में फंस गए थे। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना और संबंधित बचाव दलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 12 चीनी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला। उनके अनुसार यह केवल एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं था, बल्कि मानवता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मिसाल भी थी। उन्होंने कहा कि चीन इस सहयोग को हमेशा याद रखेगा।
साझा हित मतभेदों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण
चीनी रक्षा अटैची ने कहा कि चीन का हमेशा से मानना रहा है कि भारत और चीन के बीच मौजूद साझा हित, दोनों देशों के मतभेदों से कहीं अधिक बड़े और महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के रूप में दोनों राष्ट्रों के सामने कई समान चुनौतियां हैं, जिनका समाधान सहयोग और संवाद के माध्यम से ही संभव है। उनका मानना है कि स्थिर और सकारात्मक संबंध पूरे एशियाई क्षेत्र की शांति और विकास के लिए भी आवश्यक हैं।
संवाद और सैन्य सहयोग बढ़ाने की इच्छा
यू जियान ने दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन भारत के साथ नियमित संवाद बनाए रखना चाहता है ताकि आपसी विश्वास मजबूत हो, गलतफहमियां कम हों और सहयोग के नए अवसर विकसित किए जा सकें। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भी महत्वपूर्ण योगदान देती रही हैं और यह सहयोग भविष्य में भी जारी रहना चाहिए।
भारत-चीन संबंधों में दिख रहे सकारात्मक संकेत
हाल के महीनों में भारत और चीन के रिश्तों में सुधार के संकेत लगातार देखने को मिले हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई बैठकों के बाद कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई है। सीमा से जुड़े मुद्दों पर संवाद जारी है और दोनों पक्ष रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। हाल ही में चीन की ओर से भी यह बयान सामने आया था कि भारत और चीन ऐसे पड़ोसी हैं जिन्हें अलग नहीं किया जा सकता तथा दोनों देशों को मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
बेहतर भविष्य की जताई उम्मीद
अपने संबोधन के अंत में रियर एडमिरल यू जियान ने भारत-चीन संबंधों के भविष्य को लेकर आशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास, सहयोग और संवाद को और मजबूत किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्रीय शांति, आर्थिक प्रगति और दोनों देशों की जनता के हितों को आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि सकारात्मक बातचीत और पारस्परिक सम्मान के आधार पर भारत और चीन आने वाले समय में अपने संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।
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