Rahul Gandhi On Paper Leak : दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पुलिस की कथित लाठीचार्ज की घटना के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर है। बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर छात्रों की मांगों का समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने काली पट्टी बांधकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। राहुल गांधी ने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं।

‘रिग्ड एजुकेशन सिस्टम’ पर राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था कभी दुनिया में अपनी गुणवत्ता के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब यह “रिग्ड एजुकेशन सिस्टम” बन चुकी है। उनके अनुसार, छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है क्योंकि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय सरकार चुप्पी साधे हुए है।

10 वर्षों में 152 पेपर लीक का दावा
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल वे मामले हैं जिनकी जानकारी सार्वजनिक हो सकी है। राहुल गांधी के अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र कई वर्षों तक प्रतिदिन 8 से 10 घंटे मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा का पेपर लीक हो जाता है तो उनकी पूरी मेहनत बेकार चली जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों के पास लाखों रुपये हैं, वे गलत तरीके से परीक्षा में लाभ हासिल कर लेते हैं, जबकि ईमानदारी से तैयारी करने वाले छात्र पीछे रह जाते हैं।
शिक्षा व्यवस्था और बढ़ते आर्थिक बोझ पर सवाल
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को आम और मध्यम वर्ग के लिए लगातार महंगी होती व्यवस्था बताया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेष रूप से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी में परिवारों को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है। उनका दावा था कि सरकार जितना बजट शिक्षा पर खर्च करने की बात करती है, लगभग उतनी ही बड़ी राशि छात्र और उनके परिवार केवल परीक्षा और तैयारी पर खर्च करने के लिए मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करना और कठिन होता जा रहा है।
छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार से जवाब मांगा
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं से करोड़ों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में अब तक किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति को प्रभावी रूप से जवाबदेह नहीं ठहराया गया। उनके मुताबिक, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है।
सरकार के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग यह रही कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए। उनका कहना था कि लगातार सामने आ रही परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के बीच मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ें। दूसरी मांग यह थी कि छात्रों पर कार्रवाई करने वाले तथा कथित रूप से बल प्रयोग के आदेश देने वाले सभी जिम्मेदार अधिकारियों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें जवाबदेह बनाया जाए। तीसरी मांग के रूप में उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए, ताकि उनके बीच विश्वास बहाल हो सके।
कांग्रेस ने छात्रों की मांगों को बताया जायज़
राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह लोकतांत्रिक और न्यायसंगत हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि विरोध प्रदर्शन को केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा मानने के बजाय शिक्षा सुधार के अवसर के रूप में देखा जाए। कांग्रेस का कहना है कि यदि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद नहीं बनाया गया तो देश के युवाओं का विश्वास लगातार कमजोर होता जाएगा। पार्टी ने केंद्र सरकार से छात्रों के हित में ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की मांग की है।












