BRICS Summit 2026 : दिल्ली में आयोजित BRICS बिजनेस फोरम की बैठक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने बढ़ती चुनौतियों और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन, व्यापार और निवेश पर दिखाई दे रहा है। राजनीतिक दबाव बनाने के लिए आर्थिक साधनों के इस्तेमाल की प्रवृत्ति भी बढ़ रही है, जिससे वैश्विक आर्थिक वातावरण पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गया है।
सप्लाई चेन में रुकावट से बढ़ रही वैश्विक चिंता
पेजेश्कियान ने कहा कि दुनिया इस समय ऐसे दौर से गुजर रही है, जहां राजनीतिक और आर्थिक घटनाएं एक-दूसरे को प्रभावित कर रही हैं। किसी एक क्षेत्र में पैदा होने वाला तनाव अब केवल उस देश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर व्यापार, ऊर्जा और आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि BRICS देशों को इन चुनौतियों को गंभीरता से समझते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता को मजबूत कर सके।
BRICS को बड़ी आर्थिक शक्ति बनाने पर जोर
ईरानी राष्ट्रपति ने BRICS को और अधिक प्रभावशाली आर्थिक समूह बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी भौगोलिक स्थिति और विशाल ऊर्जा संसाधनों के कारण समूह के लिए कनेक्टिविटी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके मुताबिक ईरान विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने वाली आर्थिक और ऊर्जा कड़ी के रूप में काम करने की क्षमता रखता है। इससे व्यापारिक संपर्क बढ़ाने और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
BRICS बिजनेस काउंसिल को सक्रिय भूमिका निभाने की अपील
पेजेश्कियान ने BRICS बिजनेस काउंसिल की भूमिका को केवल संवाद तक सीमित रखने के बजाय व्यावहारिक आर्थिक सहयोग बढ़ाने वाला मंच बनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि परिषद को ऐसी परियोजनाओं पर ध्यान देना चाहिए, जिनसे वास्तविक आर्थिक परिणाम हासिल किए जा सकें। उन्होंने BRICS देशों के बीच सहयोग को संस्थागत रूप देने के लिए एक संयुक्त पुनर्बीमा कंपनी स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा।
स्थानीय मुद्राओं में क्रेडिट लाइन बनाने का सुझाव
भारत मंडपम में अपने संबोधन के दौरान पेजेश्कियान ने निवेश और आर्थिक सहयोग के लिए नई वित्तीय व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच कुछ ऐसी क्रेडिट लाइन तैयार की जा सकती हैं, जिनके माध्यम से जरूरतमंद देशों को उनकी राष्ट्रीय मुद्राओं में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए। इससे ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं को गति मिल सकती है।
राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बताया महत्वपूर्ण कदम
ईरान के राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इस दिशा में आगे बढ़ना BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। पेजेश्कियान ने स्पष्ट किया कि ईरान इस प्रक्रिया में अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है और समूह के भीतर वैकल्पिक आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है।
इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई पर निशाना
अपने भाषण में पेजेश्कियान ने इजराइल और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आर्थिक विविधता को बढ़ावा देना जरूरी है। उनके अनुसार जब व्यापार, ऊर्जा या वित्तीय प्रणालियां राजनीतिक अथवा सैन्य दबाव के अधीन हो जाती हैं, तो उसका प्रभाव संबंधित देशों की सीमाओं से बाहर भी फैलता है।
आर्थिक स्थिरता के लिए सहयोग जरूरी
पेजेश्कियान ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने के लिए देशों को आपसी सहयोग और विविध आर्थिक तंत्र विकसित करने होंगे। उनके मुताबिक व्यापार और निवेश को राजनीतिक दबाव से अलग रखने की दिशा में सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। BRICS देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं, ऊर्जा सहयोग, कनेक्टिविटी और साझा परियोजनाओं को बढ़ावा देकर वैश्विक आर्थिक अस्थिरता की चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
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