Student Protest : नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस बीच भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने छात्रों की सुरक्षा, शांतिपूर्ण माहौल और संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से एक भावुक संदेश साझा करते हुए कहा कि देश के युवाओं को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए। युवराज सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब आंदोलन को लेकर पूरे देश में बहस तेज है।

मनु भाकर और निखत ज़रीन के बाद युवराज ने रखी अपनी बात
इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देने वाले युवराज सिंह तीसरे प्रमुख भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर और विश्व चैंपियन मुक्केबाज निखत ज़रीन भी छात्रों के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक कर चुकी हैं। अब युवराज सिंह के बयान ने भी इस मामले को नई चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि उन्होंने किसी राजनीतिक पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं किया, बल्कि छात्रों के हित और शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।

इंस्टाग्राम स्टोरी में शिक्षा और सुरक्षा का दिया संदेश
युवराज सिंह ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि हर बच्चा, छात्र, महिला और पुरुष सुरक्षित माहौल में सीखने, आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का अधिकार रखता है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की भलाई ही एक मजबूत और बेहतर भारत की नींव है।
उन्होंने अपने संदेश में लोगों से अपील करते हुए कहा कि समाज को ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जहां देखभाल, अवसर और उम्मीद सभी को समान रूप से मिल सके। युवराज ने यह भी कहा कि बातचीत और आपसी समझ के जरिए देश के भविष्य के लिए सकारात्मक और स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। उनका संदेश पूरी तरह शांति, संवाद और सामाजिक जिम्मेदारी पर केंद्रित रहा।
क्या है NEET-UG परीक्षा विवाद?
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा विरोध प्रदर्शन वर्ष 2026 की NEET-UG मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं के आरोपों के बाद शुरू हुआ। बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहे हैं और पूरे मामले की स्वतंत्र तथा निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रणाली में व्यापक और पारदर्शी सुधार किए जाएं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व में किया जा रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्रों और समर्थकों की मांग है कि कथित गड़बड़ियों की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। प्रदर्शनकारी यह भी चाहते हैं कि देश में सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन की पूरी व्यवस्था की समीक्षा कर उसे अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जाए।
‘संसद चलो’ मार्च के बाद बढ़ा आंदोलन
20 जुलाई को आंदोलन ने नया मोड़ लिया, जब CJP की ओर से “संसद चलो” मार्च का आयोजन किया गया। हजारों छात्र और समर्थक जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर कूच करने के लिए एकत्र हुए। उनका उद्देश्य संसद के मानसून सत्र के दौरान अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाना था। इस दौरान राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।
झड़पों के बाद बढ़ी चिंता
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति भी बनी। पुलिस ने संसद क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैरिकेड्स लगाए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इस दौरान आंसू गैस और लाठीचार्ज किए जाने की भी खबरें सामने आईं। झड़पों में कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद प्रशासन ने प्रदर्शन स्थल पर बने अस्थायी मंच को भी हटाया।
इन घटनाओं के बीच युवराज सिंह की अपील ऐसे समय आई है, जब शिक्षा, छात्रों की सुरक्षा और शांतिपूर्ण संवाद को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। उनका संदेश इस बात पर जोर देता है कि किसी भी विवाद का स्थायी समाधान हिंसा नहीं, बल्कि आपसी संवाद, संवेदनशीलता और शांतिपूर्ण बातचीत से ही संभव है।
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