CG Education Crisis: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में नया शिक्षण सत्र शुरू हुए डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। इस लचर व्यवस्था से परेशान होकर पालकों और ग्रामीणों का गुस्सा अब फूट पड़ा है। स्थिति यह है कि जिले में रोष स्वरूप अब तक चार अलग-अलग स्कूलों में तालाबंदी की जा चुकी है, वहीं आने वाली 24 जुलाई को मुल्ले गांव के स्कूल में भी तालाबंदी की कड़ी चेतावनी दी गई है। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जिलेभर में सहायक शिक्षकों के लगभग 2,400 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से अकेले एक हजार पद लंबे समय से रिक्त पड़े हैं। इन रिक्त पदों को भरने के लिए शासन स्तर पर अब तक कोई ठोस और प्रभावी प्रयास नहीं किए गए हैं।

एक ही शिक्षक के भरोसे चल रहे दर्जनों प्राथमिक विद्यालय
जिले के प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक और दयनीय बनी हुई है। पूरे जिले में कुल 816 शासकीय प्राथमिक स्कूल संचालित हैं, जिनमें से 2 स्कूल पूरी तरह से शिक्षक विहीन हैं, यानी वहां बच्चों को पढ़ाने वाला एक भी शिक्षक मौजूद नहीं है। इसके अलावा 34 प्राथमिक स्कूलों में तालीम का पूरा दारोमदार सिर्फ एक-एक एकल शिक्षक के कंधों पर टिका हुआ है। विशेष रूप से डौंडी ब्लॉक में 20 और डौंडीलोहारा ब्लॉक में 9 स्कूलों को केवल एक ही शिक्षक के भरोसे चलाया जा रहा है। हालांकि शिक्षा विभाग ने पढ़ाई को सुचारू रखने के लिए अन्य स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी इन स्थानों पर लगाई है, लेकिन यह वैकल्पिक व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है। इन स्कूलों में बच्चे पढ़ाई से ज्यादा सिर्फ खेलकूद में समय बिता रहे हैं।

साल 2023 के बाद से नहीं हुई सहायक शिक्षकों की नई भर्ती
स्थानीय शिक्षकों और जानकारों का कहना है कि जिले में नियमित सहायक शिक्षकों की अंतिम सीधी भर्ती वर्ष 2023 में की गई थी, जिसके बाद से आज तक कोई नई भर्ती प्रक्रिया आयोजित नहीं की गई। इस बीच सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, स्थानांतरण और दुर्भाग्यवश कुछ शिक्षकों के निधन के कारण रिक्त पदों की संख्या लगातार बढ़ती चली गई। इसके साथ ही कई शिक्षक अपने मूल शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाने के बजाय अन्य प्रशासनिक विभागों या कार्यालयों में अटैचमेंट पर जमे हुए हैं। हालांकि लोक शिक्षण संचालनालय ने हाल ही में सभी संलग्न शिक्षकों को तत्काल उनकी मूल शाला में लौटने के सख्त निर्देश दिए हैं, इसके बावजूद जिले के कई विभागों में शिक्षक अब भी जमे हुए हैं।
ग्रामीण इलाकों में आक्रोश, चार स्कूलों में हो चुकी है तालाबंदी
शिक्षकों की मांग को लेकर जुलाई माह में ग्राम लिमोरा के आक्रोशित ग्रामीणों ने एक साथ संकुल परिसर के तीन स्कूलों में ताला जड़ दिया था। इससे पहले जून महीने में शासकीय प्राथमिक शाला मलकुवर में मात्र एक शिक्षक के भरोसे 32 बच्चों की पढ़ाई होने पर पालकों ने स्कूल बंद कर दिया था। ठीक इसी प्रकार जून के महीने में ही दारूटोला और डौंडी ब्लॉक के कांडे गांव में भी पालकों ने शिक्षकों की कमी से त्रस्त होकर स्कूल में तालाबंदी की थी। आपको बता दें कि अकेले कांडे गांव के स्कूल में 99 विद्यार्थियों पर मात्र 2 शिक्षक ही तैनात थे, जिससे शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई।
जिला शिक्षा अधिकारी का दावा, की जा रही है वैकल्पिक व्यवस्था
इस पूरे गंभीर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी दीपक दुबे ने बताया कि जिले के सभी शिक्षक विहीन और एकल शिक्षक वाले स्कूलों की विस्तृत जानकारी शासन को भेज दी गई है। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई किसी भी स्थिति में बाधित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा लगातार वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जा रही हैं, जबकि नियमित पदों पर शिक्षकों की नई भर्ती शासन स्तर से ही की जाएगी। इसके अलावा, अन्य विभागों में अटैच किए गए शिक्षकों को वापस उनकी मूल शाला में पदस्थ करने की प्रशासनिक प्रक्रिया भी तेजी से जारी है।
Read More : CG BEd-DElEd Counselling 2026: अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू होगी काउंसलिंग, छात्रों के लिए बड़ी अपडेट












