CJP Protest : देशभर में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जारी CJP आंदोलन को अब सुप्रीम Court के वकीलों का भी खुला समर्थन मिल गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट परिसर में बड़ी संख्या में अधिवक्ता एकत्र हुए और संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया। यह कार्यक्रम ‘सेव डेमोक्रेसी, सेव कॉन्स्टिट्यूशन’ अभियान के तहत आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त करना और उनके खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई का विरोध दर्ज कराना था। इस आयोजन ने छात्र आंदोलन को नई ऊर्जा और व्यापक समर्थन मिलने का संकेत दिया।

लंच ब्रेक के दौरान हुआ विशेष कार्यक्रम
सुप्रीम कोर्ट में दोपहर के लंच ब्रेक के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ और प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं ने भाग लिया। संविधान की प्रस्तावना का पाठ वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह और पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ वकील एस. मुरलीधर के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शामिल वकीलों ने लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों और शांतिपूर्ण विरोध की स्वतंत्रता को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इंदिरा जयसिंह ने छात्रों के समर्थन में रखी बात
मीडिया से बातचीत करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने कहा कि वकील किसी व्यक्तिगत हित या पेशेवर मांग को लेकर एकत्र नहीं हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य उन छात्रों के साथ खड़ा होना है, जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाना वकीलों की जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट न्याय का सर्वोच्च मंच है और वहीं से छात्रों के लिए न्याय की मांग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है।
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिवक्ताओं ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक रूप से पाठ करते हुए लोकतंत्र, समानता, न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। वकीलों ने यह भी कहा कि छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और उनके मुद्दों का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए।
क्या है CJP आंदोलन का मुख्य मुद्दा?
CJP आंदोलन की शुरुआत प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, धांधली और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर हुई। इस आंदोलन से जुड़े छात्र लंबे समय से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं और परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी कारण वे निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन को मिला व्यापक समर्थन
छात्रों के इस आंदोलन को उस समय और अधिक बल मिला जब प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक तथा विभिन्न छात्र संगठनों से जुड़े कई प्रतिनिधि भी उनके समर्थन में सामने आए। कुछ समर्थकों ने छात्रों की मांगों के समर्थन में भूख हड़ताल भी शुरू की। अब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों के सार्वजनिक समर्थन के बाद इस आंदोलन को नई मजबूती मिली है। इससे यह स्पष्ट हुआ है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और छात्रों के अधिकारों का मुद्दा केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि समाज के विभिन्न वर्ग भी इस विषय पर अपनी चिंता और समर्थन व्यक्त कर रहे हैं।
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