Rahul Gandhi March: नीट पेपर लीक विवाद और छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार शाम विपक्षी दलों के नेताओं के साथ मार्च निकाला। यह मार्च राहुल गांधी के सरकारी आवास से शुरू होकर गांधी स्मृति तक पहुंचा। इस दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के सांसद और वरिष्ठ नेता एकजुट होकर छात्रों के समर्थन में दिखाई दिए। विपक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों और छात्रों की मांगों पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

कई विपक्षी दलों के नेता हुए शामिल
इस मार्च में कांग्रेस के अलावा कई प्रमुख विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। इनमें शिवसेना (यूबीटी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), वामपंथी दल, समाजवादी पार्टी और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के सांसद भी मौजूद रहे। विपक्षी नेताओं की इस संयुक्त उपस्थिति को सरकार के खिलाफ साझा राजनीतिक संदेश के रूप में देखा गया। मार्च के दौरान सभी नेताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी।

राहुल गांधी ने छात्रों को लेकर जताई चिंता
मार्च के दौरान राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पेपर लीक विवाद से जुड़े घटनाक्रम ने कई परिवारों को प्रभावित किया है और छात्रों में निराशा का माहौल बना है। उन्होंने कहा कि देशभर में छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए विपक्षी सांसदों ने भी उनके समर्थन में सड़क पर उतरने का फैसला किया। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
मार्च से पहले हुई विपक्षी नेताओं की बैठक
गांधी स्मृति की ओर रवाना होने से पहले राहुल गांधी के आवास पर विपक्षी सांसदों की एक बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में आगे की रणनीति और मार्च की रूपरेखा पर चर्चा की गई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस पहले से सतर्क रही। मार्ग पर कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। मार्च शुरू होने के बाद कुछ समय के लिए रास्ता रोका गया, हालांकि बाद में प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई।
पहले भी प्रधानमंत्री आवास की ओर निकाला गया था मार्च
यह पहला अवसर नहीं है जब कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर संयुक्त प्रदर्शन किया हो। इससे पहले 21 जुलाई को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन के अवसर पर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया था। उस दौरान भी नेताओं ने कुछ समय तक धरना दिया था। विपक्ष लगातार शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को संसद और सड़क दोनों जगह उठाता रहा है।
देश के भविष्य के लिए, छात्रों के लिए pic.twitter.com/ny3FSRq0bZ
— Congress (@INCIndia) July 23, 2026
गांधी स्मृति का ऐतिहासिक महत्व
जिस स्थान तक यह मार्च निकाला गया, वह गांधी स्मृति देश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्थल है। पहले इसे बिड़ला हाउस के नाम से जाना जाता था। महात्मा गांधी ने अपने जीवन के अंतिम 144 दिन यहीं बिताए थे। 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा के लिए जाते समय इसी परिसर में उनकी हत्या कर दी गई थी। आज भी गांधी स्मृति में उनके अंतिम कदमों के निशान और वह स्थान संरक्षित है, जहां उन्हें गोली लगी थी। इसी ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए विपक्ष ने इस स्थान तक मार्च का आयोजन किया।
सरकार पर लगाए आरोप और रखी मांग
गांधी स्मृति पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि छात्रों से जुड़े मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हो रही घटनाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार को छात्रों की चिंताओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष छात्रों के साथ खड़ा है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग करता रहेगा।
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