Sonam Wangchuk: शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच गुरुवार देर रात बड़ा घटनाक्रम सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया। इसके कुछ ही समय बाद सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। यह फैसला सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया।

जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात के बाद लिया निर्णय
सोनम वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से विस्तृत चर्चा के बाद उन्होंने अनशन समाप्त करने का फैसला किया। इस दौरान लेह-लद्दाख के कुछ वरिष्ठ प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। वांगचुक ने कहा कि यह निर्णय लंबी बातचीत और विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार की ओर से कुछ महत्वपूर्ण आश्वासन मिलने के बाद आगे का रास्ता निकला।

देशवासियों से की शांति बनाए रखने की अपील
अनशन समाप्त करने के बाद जारी अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों के दौरान देशभर से विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उनसे मुलाकात की या पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया था। वांगचुक ने कहा कि उन्होंने संभावित तनाव और हिंसा की आशंका को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही एक अलग वीडियो जारी कर वे उन शर्तों और बातचीत के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी साझा करेंगे, जिनके आधार पर यह निर्णय लिया गया।
सरकार और आंदोलनकारियों के बीच कई दौर की बातचीत
पिछले लगभग एक महीने से जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों और केंद्र सरकार के बीच कई बार बातचीत हुई थी, लेकिन शुरुआती दौर में कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। बाद में दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ा और माना जा रहा है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने तथा अन्य मुद्दों पर सकारात्मक पहल के बाद माहौल बदला। इसी क्रम में सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने का निर्णय लिया।
28 जून से जारी थी भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक ने 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनका कहना था कि वे उन छात्रों और युवाओं के समर्थन में यह आंदोलन कर रहे हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ कठोर दंड की मांग उठाई।
स्वास्थ्य बिगड़ने पर अस्पताल में कराया गया था भर्ती
लगातार उपवास के कारण अनशन के 21वें दिन के आसपास सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने लगी थी। चिकित्सकों की सलाह और न्यायालय के निर्देशों के बाद उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट की अनुमति मिलने पर उन्हें गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया गया, जहां उनका उपचार जारी रहा। इसी अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों ने उनसे मुलाकात कर बातचीत की।
प्रधानमंत्री ने युवाओं को दिया भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रधानमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि कैबिनेट स्तर पर ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जाएंगे, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जा सके।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त कानून पर सरकार का जोर
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके। उन्होंने अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने की बात दोहराई और स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए आगे भी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
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