Trump Tariff : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार नीति में बड़ा कदम उठाते हुए करीब 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर नया आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने की घोषणा की है। नई व्यवस्था के तहत इन देशों से आने वाले उत्पादों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अस्थायी 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ की अवधि शुक्रवार आधी रात (स्थानीय समयानुसार) समाप्त हो रही है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कई देशों ने बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात पर प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाया गया है।

भारत के लिए राहत, 12.5% से घटकर 10% हुआ टैरिफ
इस फैसले के बीच भारत के लिए राहत की खबर भी सामने आई है। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि शुरुआती प्रस्ताव के अनुसार भारत पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना थी। हालांकि, श्रम मानकों (लेबर प्रैक्टिसेज) और बंधुआ मजदूरी से जुड़े मुद्दों पर भारत और अमेरिका के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद यह शुल्क घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया। यह शुल्क अब अमेरिकी Trade Act of 1974 के Section 301 के तहत लागू किया जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को संभावित अतिरिक्त आर्थिक बोझ से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

Section 301 क्या है और इसका महत्व क्यों बढ़ा?
ट्रंप प्रशासन ने इस बार टैरिफ लागू करने के लिए Trade Act of 1974 के Section 301 का सहारा लिया है। यह अमेरिकी कानून राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई करने का अधिकार देता है, जिनकी नीतियों को अमेरिका अनुचित, भेदभावपूर्ण या अमेरिकी व्यापार हितों के लिए नुकसानदायक मानता है। Section 301 के तहत अतिरिक्त शुल्क, व्यापार प्रतिबंध या अन्य आर्थिक कदम उठाए जा सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि यह कानूनी प्रावधान पहले की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ आधार प्रदान करता है।
IEEPA पर अदालत के फैसले के बाद बदली रणनीति
दरअसल, फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में Section 122 के तहत 150 दिनों के लिए अस्थायी 10 प्रतिशत टैरिफ लागू किया था। यह अवधि अब समाप्त हो रही है। इसी वजह से प्रशासन ने अब स्थायी कानूनी आधार के लिए Section 301 को चुना है, ताकि भविष्य में टैरिफ नीति को कानूनी चुनौती का सामना कम करना पड़े।
बंधुआ मजदूरी पर अमेरिका ने अपनाया सख्त रुख
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका लगभग एक सदी से बंधुआ मजदूरी से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लागू करता आ रहा है। उनके अनुसार अब समय आ गया है कि अमेरिका के सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी इसी तरह के सख्त मानकों को अपनाएं। उन्होंने कहा कि यदि कोई देश इन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं करता है, तो उसके खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई की जा सकती है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि नया टैरिफ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में श्रम मानकों को बेहतर बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
99 प्रतिशत आयात और 16 देशों की जांच पर असर
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक नई शुल्क व्यवस्था का प्रभाव अमेरिका में होने वाले कुल आयात के लगभग 99 प्रतिशत हिस्से पर पड़ सकता है। इसके अलावा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 16 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की अलग से जांच भी शुरू कर दी है। इन देशों पर आरोप है कि वे अत्यधिक उत्पादन (ओवरप्रोडक्शन) के जरिए वैश्विक बाजार में वस्तुओं की कीमतें कृत्रिम रूप से कम कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंच रहा है। यह जांच भविष्य में अतिरिक्त व्यापारिक प्रतिबंधों या नए टैरिफ का आधार बन सकती है।
वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है व्यापक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन का यह नया फैसला वैश्विक व्यापार संतुलन पर व्यापक असर डाल सकता है। भारत के लिए टैरिफ में राहत सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, लेकिन अन्य देशों के लिए बढ़ा हुआ शुल्क व्यापारिक लागत और निर्यात प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रभावित देश इस फैसले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या अमेरिका के साथ नए व्यापारिक समझौतों की दिशा में बातचीत तेज होती है।
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