देशभर में नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर मचे घमासान और छात्रों के उग्र विरोध प्रदर्शन के बीच अब खेल जगत की बड़ी हस्तियां भी खुलकर सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में पूर्व भारतीय दिग्गज ऑलराउंडर और क्रिकेटर इरफान पठान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट साझा कर विरोध प्रदर्शन कर रहे देश के तमाम छात्रों के साथ अपनी गहरी एकजुटता दिखाई है। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि देश का हर छात्र अपने और अपने परिवार के एक बेहतर भविष्य के निर्माण के लिए दिन-रात सालों तक कड़ी मेहनत करता है और इस दौरान उनके परिवारजन भी कई प्रकार के बड़े त्याग करते हैं।

पेपर लीक से छात्रों की उम्मीदें न हों तार-तार
अपने संदेश को आगे बढ़ाते हुए पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी स्थिति में किसी भी परीक्षा के पेपर लीक जैसी घटनाओं को छात्रों की उन उम्मीदों और सपनों को छीनने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने देश की व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों पर अपना पूरा भरोसा जताते हुए उम्मीद जताई कि वे यह सुनिश्चित करेंगे कि देश के हर एक छात्र को उसकी योग्यता के आधार पर न्याय और सही मौका मिले। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कामना की कि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति रोकने के लिए हर संभव और कड़े कदम उठाए जाने चाहिए, क्योंकि देश के युवा छात्र ही हमारा असली भविष्य हैं और उनके सपनों की रक्षा करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।

सचिन तेंदुलकर ने पिता की सीख को किया साझा
इरफान पठान से पहले, क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने भी चल रहे राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के बीच समाज से ईमानदारी, कड़ी मेहनत और काबिलियत यानी मेरिट को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की पुरजोर अपील की है। ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में सचिन ने अपने दिवंगत पिता की बहुमूल्य सीख को याद किया और बताया कि उनके पिता एक प्रोफेसर होने के साथ-साथ कई युवा छात्रों के मार्गदर्शक भी थे। उन्होंने बचपन से ही एक बहुत बड़ी सीख दी थी कि ‘जीवन में असफलता मिलना बिल्कुल ठीक है, लेकिन नकल करना या बेईमानी करना कभी ठीक नहीं है। हमें कभी भी शॉर्टकट का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए।’
छात्रों की निराशा और समाज की बड़ी जिम्मेदारी
सचिन तेंदुलकर ने वर्तमान परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आज जब देश के छात्र यह महसूस करते हैं कि उनकी वर्षों की कड़ी मेहनत का उन्हें सही फल नहीं मिल रहा है, तो उनकी यह निराशा और गुस्सा पूरी तरह से समझ में आता है। एक समाज के रूप में बड़े होने के नाते हमारी यह मुख्य जिम्मेदारी है कि हम एक ऐसी सकारात्मक संस्कृति को आकार दें। उन्होंने कहा कि जो समाज कड़ी मेहनत और प्रक्रिया के बजाय केवल परिणामों को प्राथमिकता देने लगता है, वह हमेशा काबिलियत के स्थान पर गलत शॉर्टकट तलाशने लगता है, जिससे पूरी व्यवस्था कमजोर हो जाती है।
माता-पिता और प्रशासकों से मिलकर माहौल सुधारने का आह्वान
महान क्रिकेटर ने आगे कहा कि हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि देश के युवाओं को भविष्य में कभी भी इस प्रकार की निराशा का सामना न करना पड़े। युवा भारत असीम सपनों और अनंत ऊर्जा से भरा हुआ है, जो हमारे देश की सफलता का मुख्य ईंधन हैं। समाज के प्रत्येक वर्ग—जिसमें माता-पिता, शिक्षक, मित्र, रिश्तेदार, स्कूल और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं—की एक बहुत बड़ी भूमिका और जिम्मेदारी है। हमें मिलकर यह देखना होगा कि हमारे युवा हमेशा प्रेरित, सुरक्षित और ऊर्जावान बने रहें।
कड़ी मेहनत, ईमानदारी और काबिलियत की जीत की उम्मीद
अपने संदेश के अंत में सचिन तेंदुलकर ने एक ऐसे स्वस्थ कल्चर की पुरजोर मांग की जो हमेशा कड़ी मेहनत को उचित इनाम दे, ईमानदारी को बढ़ावा दे और काबिलियत की सही पहचान करे। उन्होंने पूरा भरोसा जताया कि हम सब मिलकर ऐसे ठोस समाधान ढूंढ निकालेंगे जो हमारे देश के बच्चों के भविष्य को और अधिक मजबूत बनाएंगे तथा उनके सुनहरे सपनों को सुरक्षित रखेंगे। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘जय हिंद’ के नारे के साथ किया।
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