Parliament Row: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में जारी गतिरोध शुक्रवार को भी खत्म नहीं हो सका। विपक्षी दल अपने रुख पर कायम रहे और सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जोरदार नारेबाजी करते हुए सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे। विपक्ष का आरोप है कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर सरकार को जवाबदेही तय करनी चाहिए और शिक्षा मंत्री को पद छोड़ना चाहिए। लगातार हो रहे शोर-शराबे और हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तब भी विपक्ष का विरोध जारी रहा, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही 27 जुलाई तक स्थगित कर दी गई।

सरकार ने चर्चा के लिए जताई तैयारी
लोकसभा में कार्यवाही स्थगित होने से पहले संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपील की कि वह सदन चलने दे और नीट पेपर लीक तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा में भाग ले। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष लगातार हंगामा कर कार्यवाही बाधित कर रहा है। रिजिजू ने यह भी कहा कि यदि विपक्ष चाहे तो तत्काल चर्चा शुरू की जा सकती है। उन्होंने विपक्ष के नेताओं, विशेष रूप से राहुल गांधी से अपने सांसदों को चर्चा में भाग लेने के लिए प्रेरित करने का आग्रह किया।

सरकार ने सख्त कानून लाने का भी किया उल्लेख
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने बयान में यह भी कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है और सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी एवं सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में परीक्षा संबंधी मामलों को लेकर एक और सख्त कानूनी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में सुधार उसकी प्राथमिकता है।
संसद परिसर में विपक्ष का विरोध प्रदर्शन
संसद के भीतर हंगामे के साथ-साथ संसद परिसर में भी विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के कई नेताओं ने प्रदर्शनकारी छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई और सरकार से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। इस प्रदर्शन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष सहित कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने “हमें न्याय चाहिए” जैसे नारे लगाए और छात्रों के साथ एकजुटता जताई।
विपक्ष ने दोहराई अपनी मांग
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि विपक्ष की मांग पूरी तरह स्पष्ट है और वह शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से कम किसी बात पर तैयार नहीं होगा। विपक्ष का कहना है कि जब तक सरकार जवाबदेही तय नहीं करती और संबंधित मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। विपक्षी दलों ने इसे छात्रों के भविष्य और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
राज्यसभा में भी नहीं चल सका प्रश्नकाल
लोकसभा की तरह राज्यसभा में भी विपक्ष के हंगामे का असर देखने को मिला। सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद विपक्षी सांसदों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का विरोध करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार व्यवधान के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले सभापति सी. पी. राधाकृष्णन ने आगामी कारगिल विजय दिवस का उल्लेख करते हुए देश के शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सदन ने कुछ क्षण का मौन रखकर कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन किया।
श्रद्धांजलि के बाद फिर शुरू हुआ राजनीतिक टकराव
शहीदों को श्रद्धांजलि देने और आवश्यक संसदीय औपचारिकताएं पूरी होने के बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू करने की कोशिश की गई, विपक्षी सांसदों ने फिर से नारेबाजी शुरू कर दी। उनका कहना था कि छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और नीट पेपर लीक मामले में सरकार को जवाब देना चाहिए। इसके चलते सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी।
संसद में गतिरोध जारी रहने के आसार
संसद के दोनों सदनों में जारी टकराव से यह संकेत मिल रहे हैं कि यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति नहीं बनती, तो आने वाले दिनों में भी विधायी कार्य प्रभावित हो सकते हैं। सरकार चर्चा के जरिए समाधान निकालने की बात कर रही है, जबकि विपक्ष अपनी मांगों पर अडिग है। ऐसे में संसद का गतिरोध कब समाप्त होगा, यह आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
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