CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने आखिरकार अपना पदक खाता खोल दिया है। पैरा पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ी झंडू कुमार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की हेवीवेट स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने प्रतियोगिता में भारत को पहला पदक दिलाया। लंबे इंतजार के बाद मिले इस पदक ने भारतीय दल का उत्साह बढ़ा दिया है और आने वाले मुकाबलों के लिए खिलाड़ियों का मनोबल भी मजबूत हुआ है।

संघर्ष से सफलता तक का प्रेरणादायक सफर
झंडू कुमार की सफलता केवल एक पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके संघर्ष और दृढ़ संकल्प की कहानी भी है। बचपन में पोलियो जैसी गंभीर चुनौती का सामना करने और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक अपनी पहचान बनाई। कॉमनवेल्थ गेम्स में मिला यह पदक उनके वर्षों के संघर्ष का परिणाम माना जा रहा है।

हेवीवेट वर्ग में किया शानदार प्रदर्शन
पुरुषों की हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में झंडू कुमार ने कुल 130.9 अंक अर्जित किए। उन्होंने पहले प्रयास में 181 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद दूसरे प्रयास में 190 किलोग्राम भार उठाकर अपनी स्थिति और मजबूत कर ली। तीसरे प्रयास में उन्होंने 196 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल सकी। हालांकि शुरुआती दोनों सफल प्रयासों के आधार पर मिले अंकों ने उन्हें कांस्य पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अन्य खिलाड़ियों का प्रदर्शन भी रहा उल्लेखनीय
इसी स्पर्धा में भारत के एक अन्य खिलाड़ी सुधीर ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने 114.1 अंक प्राप्त किए और प्रतियोगिता में छठा स्थान हासिल किया। भले ही वह पदक जीतने में सफल नहीं रहे, लेकिन उनका प्रदर्शन भी सराहनीय माना गया। भारतीय दल को उम्मीद है कि आगामी प्रतियोगिताओं में वह और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
स्वर्ण और रजत पदक किसके नाम रहे
इस स्पर्धा में नाइजीरिया के इद्रिस रिलुवान ने 132.8 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता। वहीं इंग्लैंड के मैथ्यू हार्डिंग ने 131 अंकों के साथ रजत पदक अपने नाम किया। झंडू कुमार ने दोनों खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर देते हुए तीसरा स्थान हासिल किया और भारत के लिए महत्वपूर्ण कांस्य पदक सुनिश्चित किया।
अशोक मलिक पदक से मामूली अंतर से चूके
पैरा पावरलिफ्टिंग के लाइटवेट वर्ग में भी भारत के पास पदक जीतने का अच्छा अवसर था। भारतीय खिलाड़ी अशोक मलिक ने पूरे मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन वह बेहद कम अंतर से पदक से चूक गए। उन्होंने 143.8 अंक अर्जित किए और चौथे स्थान पर रहे। इस वर्ग में इंग्लैंड के मार्क स्वान ने स्वर्ण पदक, नाइजीरिया के रोलैंड एज़ुरुइके ने रजत पदक और मलेशिया के बोनी बन्याउ गुस्टिन ने कांस्य पदक जीता।
दूसरे दिन कई खेलों में दिखी भारत की चुनौती
कॉमनवेल्थ गेम्स के दूसरे दिन भारत ने केवल पावरलिफ्टिंग ही नहीं, बल्कि कई अन्य खेलों में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया। पैरा स्विमिंग की पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल S13 स्पर्धा में भारतीय तैराक कार्तिक बुदिगीना फाइनल में चौथे स्थान पर रहे। वहीं उनके साथी खिलाड़ी इमाम अली सातवें स्थान पर रहे। हालांकि दोनों खिलाड़ी पदक नहीं जीत सके, लेकिन उन्होंने फाइनल तक पहुंचकर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।
मुक्केबाजी में भी मिली शानदार सफलता
भारतीय मुक्केबाजी दल ने भी दूसरे दिन सकारात्मक शुरुआत की। मुक्केबाज जादुमणि सिंह ने अपने मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की और अगले दौर में जगह बनाई। इस जीत से भारतीय दल को आगामी मुकाबलों के लिए नई उम्मीद मिली है। दूसरे दिन की समाप्ति तक भारत के खाते में एक कांस्य पदक दर्ज हो चुका है। आने वाले दिनों में एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, कुश्ती, बैडमिंटन और अन्य स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से और अधिक पदकों की उम्मीद की जा रही है।
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