CG UCC Update: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि प्रदेश में भी यूसीसी लागू किया जाएगा। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश डॉ. रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। शुक्रवार को समिति की पहली आधिकारिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें यूसीसी के मसौदे को तैयार करने की प्रक्रिया और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

शीतकालीन सत्र में विधानसभा से पारित कराने की तैयारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उम्मीद जताई है कि आगामी शीतकालीन सत्र में समान नागरिक संहिता विधेयक को विधानसभा में पेश कर पारित कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यूसीसी का उद्देश्य प्रदेश में नागरिकों के लिए समान कानून व्यवस्था स्थापित करना है।गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश विधानसभा में भी 21 जुलाई 2026 को समान नागरिक संहिता विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दी जा चुकी है। अब छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।

यूसीसी समिति जनता से भी लेगी सुझाव, लॉन्च हो सकता है वेब पोर्टल
छत्तीसगढ़ में यूसीसी का मसौदा तैयार करने वाली समिति केवल सरकारी स्तर पर काम नहीं करेगी, बल्कि आम जनता, सामाजिक संगठनों, कानून विशेषज्ञों और विभिन्न वर्गों के लोगों से भी सुझाव लिए जाएंगे।इसके लिए राज्य सरकार जल्द ही एक विशेष वेब पोर्टल शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस पोर्टल के माध्यम से प्रदेश के नागरिक सीधे अपने सुझाव और राय समिति तक पहुंचा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य है कि यूसीसी का अंतिम प्रारूप तैयार करने से पहले सभी पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
15 अप्रैल को कैबिनेट बैठक में लिया गया था फैसला
छत्तीसगढ़ सरकार ने यूसीसी का मसौदा तैयार करने के लिए समिति गठन का निर्णय 15 अप्रैल को हुई कैबिनेट बैठक में लिया था। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 जून को समिति गठन का आधिकारिक आदेश जारी किया।
इस पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश डॉ. रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, मोहन पवार, एमके राउत और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है।
पहली बैठक में तैयार हुई कार्ययोजना
मंत्रालय में मुख्य सचिव के कक्ष में आयोजित समिति की पहली बैठक में यूसीसी के प्रारूप को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में कानून के विभिन्न पहलुओं, सामाजिक प्रभाव और प्रशासनिक प्रक्रिया पर विचार किया गया।समिति जल्द ही अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से बातचीत शुरू करेगी। इसके बाद प्राप्त सुझावों के आधार पर यूसीसी का प्रारंभिक मसौदा तैयार किया जाएगा।
समान नागरिक संहिता की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है
वर्तमान समय में विवाह, तलाक, संपत्ति अधिकार, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं। संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्यों को समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है।सरकार का मानना है कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण कई बार कानूनी जटिलताएं पैदा होती हैं। समान कानून लागू होने से व्यवस्था सरल, पारदर्शी और न्यायसंगत बनाई जा सकेगी। इसके अलावा महिलाओं को समान अधिकार और लैंगिक न्याय दिलाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
यूसीसी में शामिल हो सकते हैं ये प्रमुख प्रावधान
प्रस्तावित समान नागरिक संहिता में विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को सभी धर्मों के लिए समान बनाने की संभावना है। शादी की उम्र, विवाह प्रक्रिया और तलाक के नियमों में एकरूपता लाई जा सकती है। इसके अलावा बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने का प्रावधान भी शामिल किया जा सकता है।तीन तलाक जैसी एकतरफा तलाक प्रक्रियाओं को समाप्त कर सभी नागरिकों के लिए समान और न्यायपूर्ण नियम बनाए जाने की संभावना है।
संपत्ति अधिकार और गोद लेने के नियमों में बदलाव संभव
यूसीसी के तहत पैतृक और अर्जित संपत्ति में बेटों और बेटियों को समान अधिकार देने का प्रावधान प्रस्तावित किया जा सकता है। इससे महिलाओं के संपत्ति अधिकार और मजबूत होंगे।इसके अलावा बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को धर्म आधारित नियमों से अलग कर अधिक सरल, पारदर्शी और समान बनाने की तैयारी है। विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण जैसे प्रावधान भी यूसीसी के संभावित मसौदे में शामिल किए जा सकते हैं।
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