NEET Paper Leak Protest: देश को झकझोर देने वाले नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ आया है। कल, यानी 26 जुलाई को मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के संयुक्त नेतृत्व में एक विशाल ‘तिरंगा यात्रा’ निकाली जाएगी। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली व्यवस्था और केंद्र सरकार के रवैये के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करना है। राज ठाकरे ने इस मोर्चे को लेकर साफ कर दिया है कि यह पूरी तरह से गैर-राजनीतिक होगा और इसमें किसी भी पार्टी के झंडे का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

राज ठाकरे का खुला पत्र
इस ऐतिहासिक मोर्चे की घोषणा करते हुए राज ठाकरे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक विस्तृत पत्र साझा किया है। उन्होंने अपने सभी महाराष्ट्र सैनिकों और शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए लिखा कि आगामी 26 जुलाई को नीट परीक्षा में हुई भारी गड़बड़ियों, लगातार चल रहे छात्र आंदोलनों और सरकार द्वारा उन आंदोलनों को कुचलने के प्रयासों के विरोध में इस ‘तिरंगा मार्च’ का आयोजन किया जा रहा है। इस संबंध में दोनों दलों के केंद्रीय कार्यालयों से कार्यकर्ताओं को पहले ही आवश्यक सूचना और निर्देश दिए जा चुके हैं।

तानाशाही रवैये के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध
पत्र में आगे स्पष्ट किया गया है कि यह ‘तिरंगा मार्च’ विशेष रूप से केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के अनुचित रवैये के खिलाफ एक शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने के लिए आयोजित किया गया है। इसका सबसे बड़ा उद्देश्य पूरे देश को यह संदेश देना है कि महाराष्ट्र का हर एक नागरिक उन तमाम छात्रों, उनके पीड़ित परिवारों और उन दूर-दराज के लोगों के साथ चट्टान की तरह खड़ा है, जो अपनी आर्थिक या अन्य मजबूरियों के चलते दिल्ली या मुंबई आकर खुलकर अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज कराने में असमर्थ हैं।
पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगा यह मार्च, पार्टी के झंडे और नारों पर रहेगा पूर्ण प्रतिबंध
राज ठाकरे ने अपने पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगा। इस मार्च के दौरान किसी भी राजनीतिक दल के झंडे का उपयोग नहीं किया जाएगा और न ही किसी विशेष राजनीतिक दल या उसके नेताओं के समर्थन में हूटिंग या नारेबाजी की जाएगी। इस मोर्चे का एकमात्र लक्ष्य सरकार की नीतियों के खिलाफ कड़ा विरोध जताना और देश के युवाओं व छात्रों के समर्थन में एकजुटता दिखाना है। उन्होंने अपील की है कि भले ही इस मार्च का आह्वान उन्होंने और उद्धव ठाकरे ने संयुक्त रूप से किया है, लेकिन उनके नाम के भी नारे न लगाए जाएं। यह पूरी तरह से छात्रों का अपना मार्च है।
कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश
मोर्चे की सुरक्षा और शांति व्यवस्था को लेकर राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि कोई भी असामाजिक तत्व इस मार्च में बाधा डालने की हिम्मत नहीं करेगा, क्योंकि हर कोई उनकी ताकत से भली-भांति परिचित है। इसके बावजूद, यदि कोई शरारती तत्व माहौल खराब करने की कोशिश करता है, गलत नारे लगाता है या वहां मौजूद अभिभावकों, विशेषकर महिलाओं व छात्राओं के साथ कोई अभद्र व्यवहार करता है, तो उसे तुरंत शांतिपूर्वक पास मौजूद पुलिस के हवाले कर दिया जाए। जहां पुलिस न हो, वहां परिस्थिति के अनुसार खुद निपटने का सामर्थ्य कार्यकर्ताओं के पास है।
सुरक्षा का पूरा जिम्मा उठाने की अपील
राज ठाकरे ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में तो आएं ही, साथ ही अपने साथ अधिक से अधिक पीड़ित छात्रों और उनके अभिभावकों को भी लेकर आएं। पूरे मार्च के दौरान उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए और उन्हें सकुशल उनके घर तक पहुंचाने में पूरी मदद की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि बाकी सरकारों के बारे में उन्हें ज्यादा कुछ नहीं कहना, लेकिन उन्हें पूरा विश्वास है कि महाराष्ट्र पुलिस बच्चों के भविष्य और उनके जीवन से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर पूरी तरह से उनके साथ खड़ी नजर आएगी।
शिवाजी पार्क से होगी शुरुआत
अंत में समय और स्थान की जानकारी देते हुए सभी को 26 जुलाई को सुबह ठीक 10 बजे मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज की भव्य प्रतिमा के पास एकत्र होने का आह्वान किया गया है। राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे और तमाम नेता छात्रों व अभिभावकों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस शांतिपूर्ण मार्च के जरिए दिल्ली की सत्ता को यह अहसास कराया जाएगा कि देश की आम जनता और युवाओं के मन में कितना भारी आक्रोश भरा हुआ है। गौरतलब है कि इससे पहले उद्धव ठाकरे ने भी मौजूदा महायुति सरकार को ‘लीकेज सरकार’ करार देते हुए अयोध्या और नीट के मुद्दों पर जमकर निशाना साधा था।
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