Students Protest : नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में बड़े पैमाने पर हुई धांधली और घोटालों के खिलाफ पिछले 20 जून से देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में छात्रों का एक बेहद ऐतिहासिक और कड़ा संघर्ष चल रहा था। आखिरकार इस लंबे तथा संघर्षपूर्ण आंदोलन की बड़ी जीत हो चुकी है। छात्रों की सबसे मुख्य और बड़ी मांग के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ गया है।

छत्रपति संभाजीनगर में अभिजीत दीपके के घर पर जश्न का माहौल
केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की खबर जैसे ही देश भर में फैली, वैसे ही महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अध्यक्ष अभिजीत दीपके के आवास पर जश्न और भारी भावुकता का माहौल देखने को मिला। इस आंदोलन की शुरुआत और लगातार इसकी रूपरेखा तय करने वाले अभिजीत के घर पर समर्थकों ने इस पल का जोरदार स्वागत किया। हर तरफ खुशी का माहौल था और लोग एक-दूसरे को बधाई दे रहे थे।

अभिजीत दीपके की मां की नम आंखें और गर्व की अनुभूति
इस्तीफे की आधिकारिक घोषणा के बाद अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दीपके की मां की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि आज का यह दिन केवल उनके बेटे के व्यक्तिगत संघर्ष की जीत नहीं है, बल्कि यह देश के उन लाखों छात्रों और उनके माता-पिता के अटूट संयम तथा संघर्ष की सच्ची जीत है, जिन्होंने इस अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी। एक मां के रूप में यह उनके लिए गर्व का पल था।
शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करने वाला बड़ा जन-आंदोलन
इस संपूर्ण और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम ने न केवल देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था की तमाम गंभीर खामियों और पोल को पूरी तरह से उजागर कर दिया है, बल्कि एक बार फिर यह भी सिद्ध कर दिया है कि संगठিত जन-आंदोलन और सामूहिक शक्ति के आगे बड़ी से बड़ी सत्ता को भी अंततः झुकना ही पड़ता है। छात्रों की इस निडर एकता ने पूरे देश के सियासी गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
न्याय की इस लंबी लड़ाई का दूरगामी प्रभाव
नीट परीक्षा में हुई धांधली के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन अब देश के युवाओं की ताकत का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुका है। जंतर-मंतर से उठी इस गूंज ने सरकार को यह अहसास करा दिया है कि युवा पीढ़ी अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी व्यवस्था को कभी स्वीकार नहीं करेगी। शिक्षा के मंदिर में पारदर्शिता लाने के लिए यह संघर्ष आने वाले समय में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।
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