Ambikapur Crime: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पुलिस ने फर्जी एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अधिकारी बनकर जिला आबकारी अधिकारी से अवैध वसूली की कोशिश करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने खुद को एसीबी का अधिकारी बताकर शराब दुकानों में कथित अनियमितताओं का डर दिखाया और कार्रवाई से बचाने के नाम पर शराब तथा नकदी की मांग की। मामले की जानकारी मिलते ही गांधीनगर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल की गई कार भी जब्त कर ली है।

फोन कर खुद को बताया एसीबी अधिकारी
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पहले जिला आबकारी अधिकारी से संपर्क किया और खुद को एंटी करप्शन ब्यूरो का अधिकारी बताया। बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि शराब दुकानों के निरीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इसके बाद उन्होंने अधिकारी पर दबाव बनाना शुरू किया और कार्रवाई से बचाने का आश्वासन देते हुए शराब और नकदी की मांग की। आरोपियों ने अपने झांसे में लेकर अवैध लाभ हासिल करने की कोशिश की।

आबकारी अधिकारी को हुआ संदेह
बातचीत के दौरान जिला आबकारी अधिकारी को आरोपियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। उन्हें शक हुआ कि कॉल करने वाले व्यक्ति वास्तविक सरकारी अधिकारी नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने बिना देर किए पूरे मामले की जानकारी गांधीनगर थाना पुलिस को दी। अधिकारी की सतर्कता के कारण समय रहते मामले का खुलासा हो गया और संभावित ठगी की बड़ी वारदात टल गई।
पुलिस ने बिछाया जाल, तीनों आरोपी गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद गांधीनगर थाना पुलिस ने तत्काल रणनीति बनाकर आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सौरभ प्रजापति, राजेश पुरी गोस्वामी और रंजीत गुप्ता के रूप में हुई है। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त कार भी जब्त कर ली, जिसे कथित रूप से वारदात को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया गया था।
आरोपियों से पूछताछ जारी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या तीनों आरोपी पहले भी इसी तरह सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को ठगने या वसूली करने की घटनाओं में शामिल रहे हैं। इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे मामले में कोई संगठित गिरोह सक्रिय है या नहीं और क्या अन्य लोग भी इस नेटवर्क का हिस्सा हैं।
अन्य मामलों से भी जोड़े जा रहे हैं तार
पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि इन लोगों ने पहले भी इसी तरह की घटनाओं को अंजाम दिया है, तो जांच के दौरान अन्य मामलों का भी खुलासा हो सकता है। इसके लिए उनके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, संपर्क सूत्रों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि उन्होंने किन-किन लोगों से संपर्क किया था और क्या किसी अन्य अधिकारी या व्यक्ति को भी इसी तरह निशाना बनाने की कोशिश की गई थी।
संबंधित धाराओं में मामला दर्ज
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी अधिकारी बनकर धोखाधड़ी या अवैध वसूली की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सतर्कता से टली बड़ी ठगी की घटना
इस पूरे मामले में जिला आबकारी अधिकारी की सतर्कता और पुलिस की त्वरित कार्रवाई से एक संभावित ठगी और वसूली की घटना समय रहते विफल हो गई। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर दबाव बनाए या धन की मांग करे, तो उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना किसी भी प्रकार का भुगतान न करें और तत्काल पुलिस को सूचना दें। अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता और समय पर दी गई सूचना से इस तरह के अपराधों पर प्रभावी ढंग से रोक लगाई जा सकती है।
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