Leg Pain Warning: पैरों में दर्द होना एक आम समस्या मानी जाती है और अधिकांश लोग इसे थकान, अधिक चलने-फिरने या मांसपेशियों में खिंचाव का परिणाम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार पैरों का दर्द साधारण कारणों से नहीं होता। कई बार यह रीढ़ की हड्डी, नसों या हृदय से जुड़ी गंभीर बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसलिए यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे, बार-बार हो या उसके साथ अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो समय रहते चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

दर्द की प्रकृति को समझना है बेहद जरूरी
दिल्ली स्थित मैक्स हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन और स्पाइन विशेषज्ञ डॉ. गौरव बत्रा के अनुसार, केवल दर्द होना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भी समझना जरूरी है कि दर्द किस प्रकार का है और उसके साथ कौन-कौन से अन्य लक्षण दिखाई दे रहे हैं। यदि दर्द लगातार बढ़ रहा है या दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है, तो इसे सामान्य थकान मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। सही समय पर जांच कराने से गंभीर बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में ही हो सकती है।

स्पाइन से जुड़ी समस्या का हो सकता है संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दर्द कमर से शुरू होकर कूल्हों, जांघों और पैरों तक फैलता है तथा बिजली के झटके जैसा महसूस होता है, तो यह रीढ़ की हड्डी या नसों से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। इसके साथ यदि सुन्नपन, झुनझुनी, पैरों में कमजोरी या लंबे समय तक खड़े रहने और चलने में कठिनाई महसूस हो, तो यह स्लिप डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस या नस पर दबाव जैसी स्थितियों की ओर इशारा कर सकता है। ऐसे मामलों में बिना देरी किए स्पाइन विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित माना जाता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
यदि पैरों के दर्द के साथ पैर उठाने में कठिनाई हो, चलते समय बार-बार ठोकर लगे या पेशाब और मल त्याग पर नियंत्रण में बदलाव महसूस हो, तो इसे गंभीर संकेत माना जाना चाहिए। ऐसे लक्षण बताते हैं कि रीढ़ या नसों पर दबाव बढ़ सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि इन परिस्थितियों में स्वयं दवा लेने या घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से जांच करानी चाहिए, ताकि समस्या की सही वजह का पता लगाया जा सके।
एमआरआई जांच क्यों होती है जरूरी
स्पाइन से जुड़ी समस्याओं का संदेह होने पर डॉक्टर अक्सर एमआरआई (MRI) कराने की सलाह देते हैं। यह जांच रीढ़ की हड्डी, इंटरवर्टिब्रल डिस्क, नसों और स्पाइनल कैनाल की विस्तृत स्थिति दिखाती है। एमआरआई की मदद से यह स्पष्ट हो सकता है कि दर्द का कारण स्लिप डिस्क, नस दबना, स्पाइनल स्टेनोसिस, संक्रमण या कोई अन्य समस्या है। समय पर जांच होने से बीमारी का उपचार जल्दी शुरू किया जा सकता है और कई मामलों में सर्जरी की आवश्यकता भी टाली जा सकती है।
शुरुआती इलाज से मिल सकते हैं बेहतर परिणाम
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो कई मामलों में केवल दवाइयों, फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में सुधार के माध्यम से अच्छे परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। नियमित व्यायाम, सही बैठने की आदत, संतुलित वजन और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार अपनाने से रीढ़ और नसों से जुड़ी कई समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है।
हार्ट से जुड़ी बीमारी का भी हो सकता है संकेत
पैरों का दर्द केवल रीढ़ की समस्या से ही नहीं, बल्कि हृदय और रक्त संचार संबंधी बीमारियों का भी संकेत हो सकता है। यदि चलते समय पिंडली या जांघ में दर्द होता है और आराम करने पर दर्द कम हो जाता है, तो यह रक्त प्रवाह में रुकावट का संकेत हो सकता है। इसके अलावा यदि पैर ठंडे महसूस हों, त्वचा का रंग बदल जाए, नाड़ी कमजोर लगे या पैरों के घाव देर से भरें, तो हार्ट स्पेशलिस्ट से जांच कराना जरूरी है। ऐसे लक्षण परिधीय धमनी रोग (Peripheral Artery Disease) जैसी स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं, जो हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को भी बढ़ा सकती है।
इन लक्षणों में तुरंत अस्पताल पहुंचें
यदि पैरों के दर्द के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, अचानक कमजोरी, चक्कर आना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पैरों का दर्द यदि लंबे समय तक बना रहे या असामान्य लक्षणों के साथ हो, तो समय पर जांच और सही उपचार गंभीर जटिलताओं से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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