Ram Mandir Donation Case: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में रामलला के दानपात्र से हुई कथित चढ़ावा चोरी के मामले में नया खुलासा सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल प्रकरण में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा का संयुक्त इस्तीफा पत्र सार्वजनिक हुआ है। इस पत्र में दोनों पूर्व पदाधिकारियों ने घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों का उल्लेख किया है।पत्र में बताया गया है कि दानपात्र की राशि में हुई गड़बड़ी के बाद आरोपी युवकों और उनके परिवारों से कुल 81 लाख रुपये की राशि वापस लेकर ट्रस्ट में जमा कराई गई थी। इसके साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी (विशेष जांच दल) से जांच कराने का अनुरोध भी किया गया था।

जून महीने में सामने आई थी चढ़ावा चोरी की घटना
संयुक्त इस्तीफा पत्र के अनुसार, राम मंदिर के दानपात्र में रखी गई राशि में गड़बड़ी की घटना जून महीने के पहले सप्ताह में सामने आई थी। घटना के बाद जब मीडिया में इससे जुड़ी खबरें सामने आने लगीं तो श्रद्धालुओं के बीच चिंता और असंतोष का माहौल बन गया था।पत्र के मुताबिक, 4 जून की रात दानपात्र में जमा चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ युवकों द्वारा धनराशि चोरी किए जाने की जानकारी ट्रस्ट के एक सदस्य को मिली थी। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू की गई।

CCTV फुटेज से हुई संदिग्ध युवकों की पहचान
घटना के अगले दिन यानी 5 जून को ट्रस्ट की ओर से सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की गई। जांच के दौरान कुछ युवकों की संदिग्ध गतिविधियां सामने आईं। फुटेज के आधार पर उनकी पहचान करने की प्रक्रिया शुरू की गई।इसके बाद संदिग्ध युवकों से पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर चोरी की घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की। पूछताछ के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई और चोरी की गई राशि वापस लेने का प्रयास शुरू हुआ।
आरोपियों और परिवारों से वापस जमा कराए गए 81 लाख रुपये
इस्तीफा पत्र में दावा किया गया है कि 5 जून की रात से 8 जून के बीच आरोपी युवकों और उनके परिवारों की ओर से कुल 81 लाख रुपये की राशि ट्रस्ट में जमा कराई गई। इसके साथ ही संबंधित लोगों ने चोरी की घटना को लेकर लिखित स्वीकारोक्ति भी दी।पत्र में यह भी बताया गया कि शुरुआत में पुलिस में तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के बजाय आंतरिक स्तर पर पूछताछ और राशि वापस लेने की प्रक्रिया अपनाई गई थी। हालांकि, बाद में मामला सार्वजनिक होने और श्रद्धालुओं में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए जांच को औपचारिक रूप देने का फैसला किया गया।
निष्पक्ष जांच के लिए सरकार से मांगी गई SIT जांच
मामले की गंभीरता और ट्रस्ट की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से एसआईटी गठित कर जांच कराने की मांग की। ट्रस्ट का उद्देश्य था कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हो सके।पूर्व पदाधिकारियों ने अपने संयुक्त इस्तीफा पत्र में कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था और ट्रस्ट की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपने पदों से इस्तीफा देने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार का संदेह दूर किया जा सके।
ट्रस्ट की छवि और पारदर्शिता पर उठे सवाल
राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में दानपात्र की राशि से जुड़ा मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे थे।अब संयुक्त इस्तीफा पत्र सामने आने के बाद इस मामले में कई नए तथ्य सामने आए हैं। एसआईटी जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि चोरी की पूरी घटना कैसे हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
Read More : SAIL Rourkela Recruitment : SAIL राउरकेला में 1100 पदों पर भर्ती, बिना परीक्षा चयन का शानदार मौका











