Raja Raghuvanshi Murder Case: इंदौर के बहुचर्चित राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए मेघालय की ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत में पेश होने के बाद कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इस घटनाक्रम की पुष्टि ईस्ट खासी हिल्स जिले के पुलिस अधीक्षक विवेक सिएम ने की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत रद्द किए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है और अब आगे की सुनवाई न्यायिक हिरासत के दौरान जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने जमानत रद्द कर दिए थे सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें सोनम रघुवंशी की जमानत बरकरार रखी गई थी। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष सरेंडर करना होगा। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए आरोपी का न्यायिक हिरासत में रहना आवश्यक है। अदालत का मानना था कि जमानत पर रहने से गवाहों या जांच प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

हनीमून के दौरान हुई थी राजा रघुवंशी की रहस्यमयी मौत
यह मामला वर्ष 2025 का है, जब मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी व्यवसायी राजा रघुवंशी ने सोनम रघुवंशी से विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद दोनों हनीमून मनाने के लिए मेघालय के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोहरा पहुंचे। 23 मई 2025 को दोनों के लापता होने की सूचना सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। कई दिनों की खोजबीन के बाद 2 जून 2025 को एक गहरी खाई से राजा रघुवंशी का शव बरामद हुआ, जिससे पूरे मामले ने सनसनीखेज मोड़ ले लिया।
जांच में सामने आई हत्या की साजिश की कहानी
मेघालय पुलिस की जांच में दावा किया गया कि राजा रघुवंशी की मौत कोई दुर्घटना नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या थी। पुलिस के अनुसार, सोनम रघुवंशी ने अपने कथित प्रेमी राजा कुशवाहा के साथ मिलकर पति की हत्या की साजिश रची। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस वारदात को अंजाम देने के लिए कथित तौर पर हमलावरों की मदद ली गई और उन्हें सुपारी दी गई। पुलिस ने यह भी दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आर्थिक लाभ और निजी संबंधों से जुड़ा उद्देश्य हो सकता है।
जमानत को लेकर अदालतों में चला लंबा कानूनी विवाद
मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने 27 अप्रैल को सोनम रघुवंशी को जमानत प्रदान की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए जमानत बरकरार रखी। हालांकि, राज्य सरकार ने हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को पलटते हुए सोनम की जमानत रद्द कर दी।
छह महीने बाद दोबारा जमानत की राह खुली
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि आगामी छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा नहीं होता है, तो सोनम रघुवंशी दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती हैं। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में हैं और ट्रायल कोर्ट में मामले की नियमित सुनवाई जारी है। अब सभी की नजर इस बहुचर्चित हत्याकांड की आगे की न्यायिक प्रक्रिया और अंतिम फैसले पर टिकी हुई है।
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