Salman Rushdie Attack Case: अमेरिका की एक संघीय अदालत ने वर्ष 2022 में प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी पर हुए जानलेवा चाकू हमले के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यूयॉर्क के बफ़ेलो स्थित संघीय न्यायालय की जूरी ने न्यू जर्सी के फेयरव्यू निवासी 28 वर्षीय हादी मतार को आतंकवाद से जुड़े कई गंभीर आरोपों में दोषी करार दिया है। अदालत ने माना कि उसने विदेशी आतंकवादी संगठन हिजबुल्लाह को सामग्री सहायता देने का प्रयास किया, अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी गतिविधियों में भाग लिया और आतंकवादियों की मदद करने की साजिश रची। इस फैसले को अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कानूनी सफलता मान रही हैं।

कई महीनों तक रची गई थी हमले की साजिश
अमेरिकी अभियोजन पक्ष के अनुसार यह हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इसकी योजना लंबे समय से बनाई जा रही थी। पश्चिमी न्यूयॉर्क जिले के अमेरिकी अटॉर्नी माइकल डिगियाकोमो ने बताया कि अमेरिका में जन्मे और पले-बढ़े हादी मतार ने कट्टरपंथी विचारधारा को अपनाया और ईरानी नेतृत्व से प्रेरित हिंसक सोच के प्रभाव में आ गया। जांच में सामने आया कि उसने कई महीनों तक सलमान रुश्दी की हत्या की योजना तैयार की और सही मौके का इंतजार करता रहा। अधिकारियों ने कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की त्वरित कार्रवाई और कार्यक्रम में मौजूद लोगों की बहादुरी के कारण लेखक की जान बच सकी।

1988 के फतवे को अमल में लाने का था उद्देश्य
जांच एजेंसियों के अनुसार हादी मतार का मकसद वर्ष 1988 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता द्वारा सलमान रुश्दी के उपन्यास “सैटैनिक वर्सेज” को लेकर जारी किए गए फतवे को अमल में लाना था। 12 अगस्त 2022 को न्यूयॉर्क के चौटाउक्वा इंस्टीट्यूशन में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उसने मंच पर पहुंचकर रुश्दी पर कई बार चाकू से हमला किया। राष्ट्रीय सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने अदालत में बताया कि आरोपी ने एक वर्ष से अधिक समय तक इस विचारधारा का अध्ययन किया और हमले की पूरी तैयारी की थी।
एफबीआई जांच में सामने आए कई अहम सबूत
एफबीआई की आतंकवाद विरोधी शाखा ने अदालत को बताया कि हादी मतार ने हमले से पहले कई देशों में मौजूद लोगों से संपर्क किया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि उसने ईरान, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा में बैठे कुछ व्यक्तियों से सलमान रुश्दी के खिलाफ जारी फतवे और हिजबुल्लाह के समर्थन को लेकर बातचीत की थी। अधिकारियों के मुताबिक, उसने “Rushdie_Fatwa 2.0” और “Rushdie_Fatwa 1.6” नाम से वीडियो भी तैयार किए थे, जिनमें हिजबुल्लाह के पूर्व प्रमुख हसन नसरल्लाह के पुराने भाषणों का इस्तेमाल किया गया था। इन डिजिटल साक्ष्यों ने अभियोजन पक्ष के दावों को मजबूत किया।
फर्जी पहचान के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा था आरोपी
अदालत में पेश दस्तावेजों के अनुसार हादी मतार हमले वाले दिन चौटाउक्वा इंस्टीट्यूशन में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के साथ पहुंचा था। उसने “हसन मुगनिया” नाम का इस्तेमाल किया था, जिसे जांच एजेंसियों ने हिजबुल्लाह के दो प्रमुख नेताओं के नामों का मिश्रण बताया। अधिकारियों ने यह भी खुलासा किया कि हमले की सुबह उसने हिजबुल्लाह की वेबसाइट पर जाकर संगठन से जुड़ी सामग्री देखी और कुछ स्क्रीनशॉट भी अपने पास सुरक्षित किए थे। इन तथ्यों को अदालत ने आरोपी की पूर्व नियोजित मंशा का महत्वपूर्ण प्रमाण माना।
आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश
अदालत के फैसले के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने कहा कि यह निर्णय आतंकवाद और हिंसक कट्टरपंथ के खिलाफ न्याय व्यवस्था की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी आतंकी संगठन से जुड़े व्यक्ति या उसके समर्थकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। अब हादी मतार को सजा सुनाए जाने की अगली प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस मामले को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमले और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुकदमे के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर दुनिया भर की नजर बनी हुई है।












