US-Iran Conflict : पश्चिम एशिया में कुछ दिनों की अपेक्षाकृत शांति के बाद एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने गुरुवार तड़के ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह कार्रवाई जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुए कथित ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में की गई। इस ताजा घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं फिर तेज हो गई हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

दो घंटे तक चले हमले, कई सैन्य ठिकाने बने निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी कि लड़ाकू विमानों ने लगभग दो घंटे तक लगातार हवाई अभियान चलाया। इस दौरान ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमलों में सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्र, तटीय निगरानी सुविधाएं तथा रक्षा प्रणालियां शामिल थीं। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित केशम द्वीप पर हमलों में दो लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा उत्तर-पश्चिमी खुज़ेस्तान क्षेत्र में भी कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई देने की सूचना मिली है।

ट्रंप ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
इन हमलों से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत दिया था। व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमले का जवाब दिया जाएगा। ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका अपनी कार्रवाई करेगा और ईरान को इसका परिणाम भुगतना पड़ेगा। उनके इस बयान के तुरंत बाद अमेरिकी सैन्य अभियान शुरू होने से यह स्पष्ट हो गया कि वाशिंगटन ने जवाबी कार्रवाई का फैसला पहले ही कर लिया था।
मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन हमला, बढ़ी क्षेत्रीय चिंता
इसी बीच ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा कंपनी एम्ब्रे के अनुसार मिस्र के दमिएत बंदरगाह पर खड़े दो प्राकृतिक गैस जहाजों को ड्रोन हमले का सामना करना पड़ा। हमले के बाद दोनों जहाजों में आग लग गई। इनमें एक अमेरिकी स्वामित्व वाली फ्लोटिंग स्टोरेज यूनिट और दूसरा ग्रीक स्वामित्व वाला टैंकर बताया गया है। हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन मिस्र जैसे रणनीतिक देश के निकट हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र में युद्ध के विस्तार की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।
तेल बाजार में तेज उछाल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
लगातार बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। ताजा घटनाक्रम के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह लगभग 88 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे ईंधन की कीमतों के साथ-साथ महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।
सऊदी अरब ने भी लगाए नए आरोप
तनाव के बीच सऊदी अरब ने दावा किया है कि पिछले दो दिनों में उसकी तेल परिसंपत्तियों को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। सऊदी प्रशासन का आरोप है कि इन हमलों के पीछे इराकी मिलिशिया का हाथ है। हालांकि, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इसी पृष्ठभूमि में सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस से मुलाकात कर क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर चर्चा की।
शांति वार्ता पर लगा विराम
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कई देशों की ओर से मध्यस्थता की कोशिशें की जा रही थीं। दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने के प्रयास भी जारी थे, लेकिन ताजा सैन्य घटनाओं के बाद ये प्रयास फिलहाल ठंडे पड़ते दिखाई दे रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने अंतरिम समझौते की संभावनाओं को भी कमजोर कर दिया है।
पूर्ण युद्ध की आशंका हुई और गहरी
क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं। दोनों पक्ष फिलहाल पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहे हैं, जिससे व्यापक सैन्य संघर्ष का खतरा लगातार बढ़ रहा है। एक क्षेत्रीय अरब अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि स्थिति पहले से कहीं अधिक गंभीर हो चुकी है। यदि आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते, तो यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।












