Sanjay Raut in Parliament: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने संसद के उच्च सदन में छात्रों के विरोध प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और एंटी पेपर लीक कानून को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा बेहद गंभीर है, लेकिन सरकार इसे संवेदनशीलता के बजाय कानून-व्यवस्था के नजरिए से देख रही है। राउत ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया, जबकि उनकी मांग शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की है।

‘छात्र आंदोलन से डर क्यों रही है सरकार?’
राज्यसभा में बोलते हुए संजय राउत ने कहा कि सदन में बैठे कई वरिष्ठ नेताओं का राजनीतिक जीवन भी छात्र आंदोलनों से ही शुरू हुआ था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब छात्र अपने भविष्य को लेकर सड़क पर उतरते हैं तो सरकार उन्हें विरोधी की तरह क्यों देखती है। राउत ने कहा कि देश में आपातकाल (इमरजेंसी) की चर्चा अक्सर होती है और इतिहास गवाह है कि बड़े छात्र आंदोलनों ने ही लोकतांत्रिक बदलावों की नींव रखी थी। उन्होंने कहा कि अगर छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं तो सरकार को उनसे संवाद करना चाहिए, न कि उन्हें डराने की कोशिश करनी चाहिए।

जंतर-मंतर की घटना पर गंभीर आरोप
संजय राउत ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए और बल प्रयोग किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जिससे उनके सपनों और भविष्य पर चोट पहुंची है। राउत ने कहा कि देश के युवाओं की उम्मीदों को कुचलने की कोशिश लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है और सरकार को इस पूरे घटनाक्रम पर जवाब देना चाहिए।
गृहमंत्री की चुप्पी पर साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान संजय राउत ने केंद्रीय गृहमंत्री पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि हर छोटे-बड़े मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने वाले गृहमंत्री इस पूरे मामले में पूरी तरह मौन हैं। राउत ने व्यंग्य करते हुए कहा कि वह “लापता गृहमंत्री” नाम से फिल्म बनाने की सोच रहे हैं, क्योंकि इतने बड़े छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई के बावजूद उनकी ओर से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने भी देर से प्रतिक्रिया दी, जबकि छात्रों से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर सरकार को तत्काल संवाद करना चाहिए था।
पेपर लीक मामले में सरकार से जवाबदेही की मांग
राउत ने कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों के करियर और भविष्य का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में पेपर लीक से जुड़े कई मामलों में गिरफ्तारियां हुई हैं और कुछ आरोपियों के राजनीतिक संबंध भी सामने आए हैं। उनका कहना था कि यदि सरकारी व्यवस्था की कमजोरियों के कारण परीक्षाओं की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार को स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों का भरोसा बनाए रखने के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा प्रणाली आवश्यक है।
एंटी पेपर लीक कानून पर भी उठाए सवाल
संजय राउत ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एंटी पेपर लीक कानून की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल सजा की अवधि बढ़ाने या जुर्माने की राशि में वृद्धि कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके अनुसार, पेपर लीक की जड़ें पूरी परीक्षा प्रणाली में फैली हुई हैं और जब तक पूरे तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता नहीं लाई जाएगी, तब तक ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना मुश्किल रहेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए केवल कठोर कानून नहीं, बल्कि मजबूत प्रशासनिक सुधार और निगरानी तंत्र की भी आवश्यकता है।
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