BRICS Summit 2026: भारत की मेजबानी में सितंबर में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर चीन ने सहयोगात्मक रुख दिखाया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का समर्थन करता है और इसे सफल बनाने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है। हालांकि, सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग की व्यक्तिगत भागीदारी को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चाएं जारी हैं।

ब्रिक्स को बताया उभरती अर्थव्यवस्थाओं का अहम मंच
बीजिंग में आयोजित नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि ब्रिक्स उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच सहयोग बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंच है। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा से ब्रिक्स के ढांचे को मजबूत करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक तथा रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने के पक्ष में रहा है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और 12 से 13 सितंबर तक होने वाले शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा।

शी चिनफिंग की यात्रा पर चीन ने नहीं दी स्पष्ट जानकारी
प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आएंगे, तो चीनी विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। माओ निंग ने केवल इतना कहा कि फिलहाल इस विषय में साझा करने के लिए उनके पास कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस बयान को लेकर विभिन्न स्तरों पर अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि चीन ने सम्मेलन का समर्थन तो किया है, लेकिन अपने सर्वोच्च नेता की भागीदारी पर स्थिति साफ नहीं की है।
भारत-चीन के बीच हालिया कूटनीतिक बातचीत
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क भी जारी हैं। हाल ही में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बीजिंग का दौरा किया, जहां उन्होंने चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता की। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के अधिकारियों के बीच हुई यह बैठक सकारात्मक और रचनात्मक माहौल में संपन्न हुई। इसमें दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की गई।
सीमा विवाद और राजनीतिक विश्वास पर हुई चर्चा
दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने बैठक के दौरान शीर्ष नेतृत्व के बीच बनी सहमति को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया। साथ ही राजनीतिक विश्वास को मजबूत करने, सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान और द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर दिशा में आगे बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि संवाद और कूटनीतिक माध्यमों से मतभेदों को कम किया जाना दोनों देशों के हित में है।
ब्रिक्स सम्मेलन पर दुनिया की नजर
भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला यह ब्रिक्स शिखर सम्मेलन वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश तथा वैश्विक शासन व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग स्वयं भारत पहुंचकर सम्मेलन में हिस्सा लेते हैं या फिर चीन किसी अन्य प्रतिनिधि को भेजता है।
शी चिनफिंग के फैसले का इंतजार
फिलहाल चीन की ओर से सम्मेलन के प्रति समर्थन का संदेश तो स्पष्ट रूप से सामने आ गया है, लेकिन राष्ट्रपति शी चिनफिंग की भारत यात्रा पर आधिकारिक पुष्टि नहीं होने से सस्पेंस बना हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक संवाद और आधिकारिक घोषणाएं इस मुद्दे पर तस्वीर साफ कर सकती हैं। यदि शी चिनफिंग सम्मेलन में शामिल होते हैं, तो यह भारत-चीन संबंधों और क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जाएगा।
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