CJP March Violence : दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर अब घायल पुलिसकर्मियों के परिवार सामने आए हैं। शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस जवानों के परिजनों ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए न्याय की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर, जूते-चप्पल और अन्य वस्तुओं से हमला किया, जिससे कई जवान घायल हुए।

5 आईपीएस अधिकारियों समेत 180 पुलिसकर्मी हुए घायल
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस के अनुसार, इस हिंसक घटना में 5 आईपीएस अधिकारियों समेत करीब 180 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि लगभग 60 प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आईं। घायल जवानों के परिजनों ने कहा कि पुलिसकर्मी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी कर रहे थे, लेकिन उन पर ही हमला किया गया।

एसीपी के बेटे ने प्रदर्शनकारियों पर उठाए सवाल
घायल एसीपी के बेटे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके पिता ने पहले ही महसूस किया था कि जंतर-मंतर का प्रदर्शन केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने बताया कि उनके पिता का कहना था कि प्रदर्शन में शामिल कई लोग छात्र नहीं लग रहे थे और इसमें कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं। इसके अगले ही दिन वह हिंसा में घायल हो गए।उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग पुलिसकर्मियों को ही आरोपी बताने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हकीकत में पुलिस पर हमला हुआ था। उन्होंने बताया कि न्याय की उम्मीद लेकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के अधिकारों को भी सुना जाएगा।
सब इंस्पेक्टर के बेटे ने सुनाई पिता की दर्दनाक कहानी
कुंजल नाम के युवक ने बताया कि उनके पिता दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं और जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान फ्रंट लाइन बैरिकेड पर तैनात थे। उन्होंने कहा कि उनके पिता कई दिनों से बता रहे थे कि यह आंदोलन अब छात्रों का आंदोलन नहीं रह गया है और इसमें कुछ गलत लोग शामिल हो गए हैं।कुंजल ने बताया कि हिंसा के अगले दिन उनके पिता घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचे। उनकी वर्दी खून से पूरी तरह लाल थी और उन्हें चार टांके लगे थे। इसके बावजूद उन्होंने परिवार को समझाते हुए कहा कि चोट लगती रहती है और चिंता करने की जरूरत नहीं है।
पुलिसकर्मी की पत्नी ने बताया हमला कितना खतरनाक था
दिल्ली पुलिस में एएसआई के पद पर तैनात जवान की पत्नी सीमा ने भी अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि उनके पति पहले कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुए थे और मेहनत के बाद एएसआई बने। 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर उनकी ड्यूटी लगी थी।सीमा ने बताया कि सुबह उनके पति ने फोन कर कहा था कि प्रदर्शन स्थल पर भीड़ बढ़ गई है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे हैं। शाम को जब उन्होंने फोन किया तो पता चला कि उनके पति एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है।
गमलों, पत्थरों और जूतों से हमले का आरोप
सीमा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ उग्र हो गई थी और कुछ लोगों ने पुलिस बल पर गमले, पत्थर, जूते और चप्पलों से हमला किया। उन्होंने बताया कि उनके पति का हेलमेट तक टूट गया था। अगर पत्थर सीधे सिर पर लग जाता तो उनकी जान भी जा सकती थी।उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी संसद की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात थे, लेकिन उनके साथ हुए हमले को नजरअंदाज किया जा रहा है।
संसद में पुलिसकर्मियों की आवाज उठाने की अपील
घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने संसद के सदस्यों से अपील की कि वे पुलिस जवानों और उनके परिवारों की स्थिति पर भी चर्चा करें। उन्होंने कहा कि अब तक केवल प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई की बात सामने लाई जा रही है, जबकि पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों का पक्ष भी जनता के सामने आना चाहिए।परिजनों का कहना है कि संसद देश के सम्मान का प्रतीक है और उसकी सुरक्षा में लगे जवानों के अधिकारों और सुरक्षा को भी उतनी ही गंभीरता से उठाया जाना चाहिए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
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