Trump Iran Tension: ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे यानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने पर विचार कर सकता है। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी जारी की है।

ईरान ने अमेरिका को दी बड़े हमले की धमकी
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने अमेरिका और इज़राइल की ओर से किसी भी नए सैन्य हमले की स्थिति में जवाब देने के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है। ईरान का कहना है कि अगर उस पर हमला किया गया तो वह मध्य पूर्व के प्रमुख तेल और गैस ठिकानों को निशाना बना सकता है। इससे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर ऊर्जा संकट पैदा होने की आशंका जताई जा रही है।रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने उन ऊर्जा ठिकानों की सूची तैयार की है जिन्हें संभावित जवाबी कार्रवाई में निशाना बनाया जा सकता है। इसमें सऊदी अरब का घावर ऑयल फील्ड सबसे प्रमुख बताया जा रहा है। यह दुनिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्रों में शामिल है और वैश्विक तेल आपूर्ति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

सऊदी अरब और यूएई के तेल केंद्रों पर नजर
ईरान की कथित सूची में सऊदी अरब की अबकैक और खुराईस तेल सुविधाएं भी शामिल हैं। इन स्थानों पर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का उत्पादन और प्रसंस्करण किया जाता है। इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात के जाकुम ऑयल फील्ड और रुवाइस रिफाइनरी को भी संभावित निशाने के रूप में बताया गया है।रुवाइस रिफाइनरी खाड़ी क्षेत्र की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक है, जहां प्रतिदिन लाखों बैरल तेल को प्रोसेस किया जाता है। इन ठिकानों पर हमला होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर पड़ सकता है।
कतर और अन्य देशों के गैस ठिकाने भी सूची में शामिल
ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की सूची में कतर का नॉर्थ फील्ड और रास लाफान गैस कॉम्प्लेक्स भी शामिल बताए जा रहे हैं। ये दोनों केंद्र वैश्विक एलएनजी यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस व्यापार में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।इसके अलावा कुवैत का बुरगन ऑयल फील्ड, बहरीन की सित्रा रिफाइनरी और अल-मिहाज क्षेत्र के साथ-साथ इज़राइल के लेविआथन और तामार गैस फील्ड भी संभावित निशानों में शामिल बताए गए हैं।
ईरान ने दोहराया पुरानी गलती नहीं करेगा अमेरिका
तस्नीम न्यूज के अनुसार, ईरान के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि देश ने अमेरिका की किसी भी संभावित कार्रवाई का जवाब देने के लिए व्यापक योजना तैयार कर ली है। अधिकारी ने पहले हुए 40 दिनों के संघर्ष का भी जिक्र किया और कहा कि ईरान किसी भी स्थिति के लिए तैयार है।उन्होंने दावा किया कि पिछले संघर्ष के दौरान भी ईरान ने क्षेत्रीय ठिकानों को निशाना बनाया था और अब वह पहले जैसी स्थिति दोहराने की अनुमति नहीं देगा।

ट्रंप ने अभी तक नहीं लिया अंतिम फैसला
हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ट्रंप इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।बताया जा रहा है कि संभावित सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान पर दबाव बनाना है ताकि वह युद्धविराम वार्ता में अमेरिका की शर्तों को स्वीकार करे।रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ कार्रवाई करता है तो इज़राइली सेना भी इसमें शामिल हो सकती है। इससे क्षेत्र में संघर्ष और अधिक बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की ओर से जवाबी मिसाइल हमले शुरू होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
मिडिल ईस्ट में ऊर्जा संकट का खतरा
अगर ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जाता है, तो इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमतें बढ़ने का खतरा है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।
Read More : US Visa Bond Program: 50 देशों पर नया नियम, क्या भारतीयों के लिए भी बढ़ेगी परेशानी?












