Vastu Tips : घर बनाते समय हर कमरे की जरूरत और उपयोग के अनुसार योजना तैयार की जाती है। वहीं, पूजा घर के लिए स्थान चुनते समय कई परिवार विशेष सावधानी बरतते हैं। यह घर का वह हिस्सा होता है, जहां नियमित रूप से पूजा-पाठ, ध्यान और धार्मिक गतिविधियां की जाती हैं। वास्तु शास्त्र की मान्यताओं में भी पूजा स्थल की दिशा, आसपास का वातावरण और उसके ऊपर-नीचे की जगह को लेकर कुछ सुझाव बताए गए हैं।
पूजा घर के ऊपर भारी सामान रखने से बचें
वास्तु मान्यताओं के अनुसार पूजा घर के ठीक ऊपर ऐसी जगह बनाने से बचना चाहिए, जहां भारी सामान रखा जाता हो। पूजा स्थल के ऊपर भारी फर्नीचर, स्टोर रूम या लगातार शोर और आवाजाही वाली जगह होने को कई लोग उचित नहीं मानते। पूजा घर के आसपास शांत, स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण रखने की सलाह दी जाती है। इससे परिवार के लोग बिना किसी परेशानी के पूजा और ध्यान कर सकते हैं।
पूजा घर के ऊपर बेडरूम बनाना कैसा माना जाता है
वास्तु से जुड़ी मान्यताओं में पूजा घर के ठीक ऊपर बेडरूम बनाने से बचने की सलाह दी जाती है। खासतौर पर पूजा स्थल के ठीक ऊपर बेड, भारी अलमारी या अन्य फर्नीचर रखने को वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। हालांकि, छोटे मकान या सीमित जगह वाले घरों में ऐसा करना मजबूरी हो सकता है। ऐसी स्थिति में घर की संरचना के अनुसार वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेने की बात कही जाती है।
पूजा घर के ऊपर बाथरूम बनाने से क्यों बचते हैं
पूजा स्थल के ठीक ऊपर बाथरूम या टॉयलेट होने को भी वास्तु मान्यताओं में अच्छा नहीं माना जाता। इसका कारण धार्मिक और स्वच्छता से जुड़ी धारणाएं हैं। पूजा घर को पवित्र और साफ स्थान माना जाता है, इसलिए उसके ऊपर ऐसी जगह बनाने से बचने की सलाह दी जाती है, जिसका उपयोग स्नानघर या शौचालय के रूप में होता है। घर का नक्शा तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जा सकता है।
पूजा घर के नीचे भी नहीं होना चाहिए बाथरूम
केवल पूजा घर के ऊपर ही नहीं, बल्कि उसके ठीक नीचे बाथरूम या टॉयलेट होने से भी बचने की सलाह वास्तु मान्यताओं में दी जाती है। इसी तरह पूजा स्थल के नीचे कबाड़, गंदगी या लंबे समय तक अनुपयोगी सामान रखने वाली जगह नहीं होनी चाहिए। यदि घर का निर्माण शुरुआत से हो रहा है, तो पूजा घर की सीधी लाइन में ऊपर और नीचे के कमरों की योजना पहले ही बनाना बेहतर माना जाता है।
ईशान कोण को पूजा घर के लिए माना जाता है खास
वास्तु शास्त्र की मान्यताओं में घर के उत्तर-पूर्व हिस्से यानी ईशान कोण को पूजा स्थल के लिए विशेष महत्व दिया गया है। इसके अलावा पूर्व और उत्तर दिशा को भी कई वास्तु मान्यताओं में पूजा घर के लिए उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, घर की बनावट, कमरों की स्थिति और उपलब्ध जगह के आधार पर पूजा स्थल का स्थान अलग हो सकता है।
पूजा घर के आसपास साफ-सफाई का रखें ध्यान
पूजा घर चाहे जिस दिशा में बनाया जाए, उसके आसपास स्वच्छता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। पूजा स्थल को ऐसे स्थान पर रखने से बचना चाहिए जहां लगातार गंदगी, अव्यवस्था या अनावश्यक सामान जमा रहता हो। रोजाना पूजा करने वाले परिवारों के लिए ऐसी जगह अधिक सुविधाजनक होती है, जहां आसानी से पहुंचा जा सके और नियमित सफाई भी की जा सके।
नया घर बनाते समय पहले तय करें पूजा स्थल
अगर आप नया घर बनवा रहे हैं तो पूजा घर की जगह पहले से तय करना उपयोगी रहेगा। नक्शा बनाते समय ही पूजा स्थल निर्धारित करने से उसके ऊपर और नीचे बनने वाले कमरों की योजना उसी अनुसार तैयार की जा सकती है। इससे बाद में पूजा घर के लिए जगह बदलने या किसी कमरे की संरचना में बदलाव करने की जरूरत कम पड़ सकती है।
वास्तु मान्यताओं के साथ सुविधा भी देखें
पूजा घर से जुड़ी वास्तु बातें धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसलिए घर की योजना बनाते समय इन्हें ध्यान में रखने के साथ परिवार की सुविधा, उपलब्ध जगह, रोशनी, हवा और स्वच्छता जैसे व्यावहारिक पहलुओं को भी देखना चाहिए। सीमित जगह वाले घरों में वास्तु विशेषज्ञ की सलाह लेकर उपलब्ध स्थान का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।
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