Chaturmas End Date 2026 : हिंदू धर्म में चातुर्मास की अवधि को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। मान्यता के अनुसार, इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में रहते हैं। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों को इस अवधि में करने से बचने की परंपरा है। चातुर्मास लगभग चार महीने तक चलता है, जबकि मलमास और खरमास की अवधि सामान्यतः एक महीने की मानी जाती है।
25 जुलाई से शुरू हुआ चातुर्मास
साल 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई से मानी गई है और इसका समापन 21 नवंबर को होगा। इस दौरान श्रावण, भाद्रपद, अश्विन और कार्तिक मास शामिल रहते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय विवाह जैसे भौतिक और मांगलिक आयोजनों की बजाय पूजा-पाठ, व्रत, जप, तप और साधना के लिए उपयुक्त माना जाता है।
नवंबर में मिलेंगे शादी के सिर्फ चार शुभ दिन
चातुर्मास खत्म होने के बाद नवंबर 2026 में विवाह के लिए सीमित शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इस महीने शादी के लिए 21, 24, 25 और 26 नवंबर को शुभ तिथियां बताई गई हैं। ऐसे में नवंबर में विवाह की तैयारी कर रहे परिवारों के लिए इन तारीखों का महत्व बढ़ जाता है।
21 नवंबर को विवाह का शुभ मुहूर्त
21 नवंबर 2026, शनिवार को विवाह के लिए मुहूर्त सुबह 6:44 बजे से शुरू होकर 22 नवंबर की सुबह 12:08 बजे तक बताया गया है। इस दिन रेवती नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। विवाह आयोजन की योजना बनाने वाले लोग स्थानीय पंचांग के अनुसार समय का मिलान कर सकते हैं।
24 से 26 नवंबर तक लगातार मुहूर्त
24 नवंबर को विवाह मुहूर्त रात 11:25 बजे से 25 नवंबर की सुबह 6:47 बजे तक रहेगा। 25 नवंबर को सुबह 6:47 बजे से 26 नवंबर की सुबह 6:48 बजे तक मुहूर्त बताया गया है। वहीं 26 नवंबर को सुबह 6:48 बजे से शाम 5:47 बजे तक विवाह के लिए शुभ समय रहेगा।
दिसंबर में सात दिन विवाह के लिए शुभ
दिसंबर 2026 में शादी-ब्याह के लिए सात शुभ दिन बताए गए हैं। इनमें 2, 3, 4, 5, 6, 11 और 12 दिसंबर शामिल हैं। 2 दिसंबर को नवमी और दशमी तिथि, जबकि 3 दिसंबर को उत्तर फाल्गुनी और हस्त नक्षत्र का उल्लेख किया गया है। 4 दिसंबर को एकादशी तिथि रहेगी।
5 और 6 दिसंबर के मुहूर्त
5 दिसंबर को द्वादशी और त्रयोदशी तिथि तथा 6 दिसंबर को त्रयोदशी तिथि रहेगी। इसके बाद 11 दिसंबर को तृतीया और 12 दिसंबर को तृतीया तथा चतुर्थी तिथि बताई गई है। विवाह की अंतिम तारीख तय करने से पहले परिवारों को अपने क्षेत्र के पंचांग और विवाह मुहूर्त का मिलान करना चाहिए।
चातुर्मास में शादी क्यों नहीं होती
धार्मिक मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार महीने के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के विश्राम में रहने के कारण विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह समय संयम, व्रत, साधना और आध्यात्मिक चिंतन के लिए समर्पित माना जाता है।
देवउठनी एकादशी से शुरू होते हैं मांगलिक कार्य
चातुर्मास का समापन कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी पर माना जाता है। धार्मिक परंपरा में इसी दिन भगवान विष्णु के जागने और तुलसी विवाह के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इसलिए नवंबर और दिसंबर में विवाह की योजना बना रहे लोगों के लिए चातुर्मास की समाप्ति के बाद आने वाली शुभ तिथियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
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