Raj Thackeray on Siddhivinayak : महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर और अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर में वर्षों तक दान राशि में कथित अनियमितताएं होती रहीं, जबकि अयोध्या के राम मंदिर में भी बड़ी राशि की कथित चोरी का मामला सामने आया है। राज ठाकरे ने कहा कि यदि धार्मिक संस्थानों में भी वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देने की भी मांग की।

छात्र कार्यक्रम में उठाया दान प्रबंधन का मुद्दा
राज ठाकरे शनिवार को एमएनएस की छात्र इकाई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिरों में दान देते हैं, इसलिए वहां वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होना बेहद आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों का खुलासा ट्रस्ट के कुछ सदस्यों की सतर्कता के बाद हुआ। उनके अनुसार, इस मामले ने धार्मिक संस्थानों में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।

सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर क्या दावा किया?
राज ठाकरे ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर के दान पात्र से कथित रूप से धन की हेराफेरी की जा रही थी। उन्होंने कहा कि ट्रस्टियों द्वारा सतर्कता बरतने के बाद कुछ कर्मचारियों की भूमिका सामने आई। ठाकरे के अनुसार, इस कथित गड़बड़ी का पता चलने से पहले मंदिर की साप्ताहिक दान राशि 50 लाख रुपये से कम रहती थी, लेकिन कार्रवाई के बाद यह बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ रुपये प्रति सप्ताह हो गई। इसी आधार पर उन्होंने आरोप लगाया कि पहले हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी हो रही थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा नहीं की गई है।
ट्रस्ट अध्यक्ष ने गिरफ्तारी की पुष्टि की
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और शिवसेना नेता सदा सरवणकर ने मीडिया से बातचीत में बताया कि इस मामले में नौ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां भी अनियमितताओं की जानकारी मिली, वहां नियमानुसार पुलिस में मामले दर्ज कराए गए और कानूनी कार्रवाई की गई। सरवणकर ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रस्ट लगातार वित्तीय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कदम उठा रहा है और दान प्रबंधन को अधिक पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
मंदिर की आय में बढ़ोतरी का दावा
सदा सरवणकर ने बताया कि ट्रस्ट द्वारा किए गए सुधारात्मक प्रयासों का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। उनके अनुसार, दो वर्ष पहले मंदिर की वार्षिक आय लगभग 114 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर करीब 182 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। उनका कहना है कि यह वृद्धि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या, बेहतर प्रबंधन और पारदर्शी व्यवस्था का परिणाम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ट्रस्ट वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी कर रहा है।

अयोध्या राम मंदिर का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में राज ठाकरे ने अयोध्या के राम मंदिर का भी उल्लेख करते हुए वहां दान राशि में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि वहां भी बड़ी राशि की कथित चोरी का मामला सामने आया है। दूसरी ओर, संबंधित मामलों में पुलिस जांच जारी रहने की जानकारी सामने आई है और कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई है। हालांकि, मामले की अंतिम सच्चाई जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर बढ़ी चर्चा
राज ठाकरे के इन आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्टों में वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। धार्मिक संस्थानों में आने वाले दान का उपयोग किस प्रकार किया जाता है और उसकी निगरानी कैसे होती है, यह मुद्दा फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। फिलहाल संबंधित मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी है। ऐसे में इन आरोपों की पुष्टि या खंडन आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही संभव होगा।
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