Plum Gardening Tips: इन दिनों घर पर गार्डनिंग करने का शौक तेजी से बढ़ रहा है। लोग अपनी बालकनी, छत या छोटे से आंगन में सब्जियों और फलों के पौधे लगाकर प्राकृतिक खेती का आनंद ले रहे हैं। आमतौर पर गमलों में धनिया, टमाटर, मिर्च या पुदीना उगाया जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि स्वादिष्ट और पौष्टिक आलूबुखारा भी गमले में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यदि सही किस्म का पौधा, उपयुक्त मिट्टी और नियमित देखभाल मिले, तो कुछ ही समय में यह पौधा फल देना शुरू कर सकता है। घर में उगाए गए ताजे आलूबुखारे न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि रसायनों से मुक्त होने के कारण स्वास्थ्य के लिए भी बेहतर माने जाते हैं।

सही गमला और मिट्टी का चयन है सबसे जरूरी
आलूबुखारे का पौधा स्वस्थ तरीके से विकसित हो, इसके लिए सबसे पहले सही आकार का गमला चुनना आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार कम से कम 16 से 18 इंच गहरा और चौड़ा गमला उपयोग करना चाहिए, ताकि जड़ों को पर्याप्त जगह मिल सके। गमले के नीचे जल निकासी के लिए ड्रेनेज होल होना भी जरूरी है, जिससे अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके और जड़ें सड़ने से बची रहें।

मिट्टी तैयार करते समय सामान्य बगीचे की मिट्टी में लगभग 30 प्रतिशत अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट मिलाएं। इसके साथ थोड़ा कोकोपीट या रेत मिलाने से मिट्टी हल्की और भुरभुरी बनी रहती है। गमले के तल में छोटे कंकड़ या टूटे हुए मिट्टी के टुकड़े रखने से पानी का निकास बेहतर होता है और पौधे की जड़ों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है।
बीज नहीं, ग्राफ्टेड पौधा रहेगा बेहतर विकल्प
अगर आप आलूबुखारे की गुठली से पौधा उगाने की सोच रहे हैं, तो इसमें काफी समय लग सकता है और फल आने की संभावना भी कम रहती है। इसलिए घर की गार्डनिंग के लिए किसी भरोसेमंद नर्सरी से ग्राफ्टेड पौधा खरीदना अधिक उपयुक्त माना जाता है।
ग्राफ्टेड पौधे सामान्य पौधों की तुलना में तेजी से बढ़ते हैं और अच्छी देखभाल मिलने पर लगभग एक से दो वर्षों के भीतर फूल और फल देना शुरू कर सकते हैं। पौधा खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि उसकी पत्तियां हरी हों, तना मजबूत हो और उसमें किसी प्रकार के रोग या कीट के लक्षण न दिखाई दें। पौधे को गमले में लगाते समय उसकी जड़ों को नुकसान न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखें और रोपाई के तुरंत बाद पर्याप्त पानी दें।

धूप, सिंचाई और खाद का रखें विशेष ध्यान
आलूबुखारे के पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए प्रतिदिन कम से कम पांच से छह घंटे सीधी धूप मिलना जरूरी है। इसलिए गमले को ऐसी जगह रखें जहां भरपूर धूप आती हो। धूप की कमी होने पर पौधे की वृद्धि धीमी हो सकती है और फल भी कम लग सकते हैं।
सिंचाई करते समय यह ध्यान रखें कि मिट्टी की ऊपरी परत सूखने के बाद ही पानी दें। जरूरत से ज्यादा पानी देने पर जड़ों में सड़न हो सकती है। इसके अलावा हर 20 से 25 दिन के अंतराल पर जैविक खाद जैसे गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट या नीम खली डालने से पौधे को पर्याप्त पोषण मिलता है। फूल आने के समय फास्फोरस युक्त खाद देने से फल अधिक स्वस्थ और बड़े विकसित होते हैं।
नियमित कटाई-छंटाई से बढ़ेगी फल देने की क्षमता
गमले में लगे फलदार पौधों की समय-समय पर कटाई-छंटाई करना आवश्यक होता है। सर्दियों के अंत में सूखी, कमजोर या रोगग्रस्त शाखाओं को हटा देने से नई शाखाएं तेजी से विकसित होती हैं और पौधा अधिक फल देने में सक्षम बनता है। सही प्रूनिंग से पौधे का आकार भी संतुलित रहता है और हवा का संचार बेहतर होता है।
कीट और फंगस से ऐसे करें पौधे की सुरक्षा
आलूबुखारे के पौधे पर कभी-कभी छोटे कीड़े या फफूंद का हमला हो सकता है, जिससे पत्तियां और फल प्रभावित होते हैं। इससे बचाव के लिए हर 15 से 20 दिनों में नीम के तेल का घोल बनाकर पौधे पर छिड़काव करना एक प्रभावी घरेलू उपाय माना जाता है। इसके साथ ही पौधे की नियमित निगरानी करते रहें और संक्रमित पत्तियों को तुरंत हटा दें।
यदि पौधे को सही धूप, संतुलित पानी, पर्याप्त पोषण और समय पर देखभाल मिलती रहे, तो कुछ ही समय में आपका गमला हरे-भरे पौधे और लाल, रसीले आलूबुखारों से भर सकता है। इस तरह आप अपने घर पर ही ताजे और स्वादिष्ट फलों का आनंद ले सकते हैं।
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