सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कटौती की है। डीजल का शुल्क 25 से घटाकर 20 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जबकि पेट्रोल पर यह 1.5 से घटकर 0.5 रुपये हुआ। नए रेट 16 सितंबर से प्रभावी हैं।
सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कटौती की है। डीजल का शुल्क 25 से घटाकर 20 रुपये प्रति लीटर किया गया है, जबकि पेट्रोल पर यह 1.5 से घटकर 0.5 रुपये हुआ। नए रेट 16 सितंबर से प्रभावी हैं।

Windfall Tax Cut : केंद्र सरकार ने पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगाए जाने वाले शुल्क में एक बार फिर कटौती की है। 16 सितंबर 2026 को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, नए शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की परिस्थितियों और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को ध्यान में रखते हुए इन निर्यात शुल्कों की समीक्षा करती रही है।


नई दरों के तहत डीजल के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 25 रुपये से घटाकर 20 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यानी डीजल निर्यातकों को अब प्रत्येक लीटर पर पहले की तुलना में 5 रुपये कम शुल्क देना होगा। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कीमतों और आपूर्ति को लेकर लगातार बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में भी बड़ी कटौती की है। पहले पेट्रोल निर्यात पर 1.5 रुपये प्रति लीटर की लेवी लागू थी, जिसे अब घटाकर महज 50 पैसे प्रति लीटर कर दिया गया है। इस बदलाव से पेट्रोल निर्यात करने वाली कंपनियों पर शुल्क का बोझ कम होगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी ATF के निर्यात पर भी सरकार ने शुल्क कम किया है। नई व्यवस्था के तहत ATF पर लगने वाला टैक्स 19 रुपये से घटाकर 15 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इस तरह विमान ईंधन के निर्यात पर कंपनियों को पहले के मुकाबले 4 रुपये प्रति लीटर की राहत मिलेगी।
सरकार के ताजा आदेश में तीन प्रमुख पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर बदलाव किया गया है। डीजल पर 25 से 20 रुपये, पेट्रोल पर 1.5 से 0.5 रुपये और ATF पर 19 से 15 रुपये प्रति लीटर शुल्क तय किया गया है। इससे स्पष्ट है कि इस बार पेट्रोल पर कटौती प्रतिशत के लिहाज से सबसे बड़ी है, जबकि डीजल और ATF पर भी शुल्क में उल्लेखनीय कमी की गई है।

निर्यात शुल्क में कटौती का मतलब यह जरूरी नहीं है कि देश के पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या डीजल की खुदरा कीमतें भी तुरंत घट जाएंगी। निर्यात लेवी मुख्य रूप से विदेश भेजे जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू होती है। घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें कई अन्य कारकों, जैसे कच्चे तेल की कीमत, कर, रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति से प्रभावित होती हैं।
सरकार ने 2026 में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क में कई बार बदलाव किया है। मार्च 2026 में पश्चिम एशिया संकट के बीच पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क लागू किए गए थे। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखना और अत्यधिक निर्यात को हतोत्साहित करना था। बाद की समीक्षाओं में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और बाजार की स्थिति के आधार पर इन दरों को कई बार बदला गया।
2026 में सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क की समीक्षा नियमित अंतराल पर की है। अप्रैल में जारी सरकारी जानकारी के मुताबिक इन दरों की समीक्षा प्रत्येक पखवाड़े की जाती थी और पिछली अवधि में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल तथा ATF की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों को आधार बनाया जाता था। इससे संकेत मिलता है कि निर्यात लेवी को बाजार परिस्थितियों के अनुसार समायोजित किया जाता है।
ताजा कटौती से भारतीय रिफाइनरियों और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातकों के लिए लागत में कमी आ सकती है। शुल्क कम होने से निर्यात के दौरान प्रति लीटर सरकारी लेवी घटेगी। हालांकि इसका वास्तविक व्यावसायिक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों, मांग, शिपिंग लागत और कंपनियों की निर्यात रणनीति जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।
भारत की रिफाइनिंग क्षमता बड़ी है और देश पेट्रोलियम उत्पादों का महत्वपूर्ण निर्यातक भी है। ऐसे में निर्यात शुल्क में बदलाव का असर कंपनियों के व्यापारिक फैसलों पर पड़ सकता है। सरकार की ओर से 2026 में पहले घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से शुल्क लगाए गए थे। अब कटौती इस नीति के अगले चरण का हिस्सा है और इसका असर आने वाले समय में निर्यात प्रवाह में दिखाई दे सकता है।
ताजा आदेश के बाद पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क पहले की तुलना में कम हो गया है। डीजल पर 20 रुपये, पेट्रोल पर 50 पैसे और ATF पर 15 रुपये प्रति लीटर की नई दरें लागू हैं। कारोबार से जुड़े पक्ष अब इस बदलाव के बाद अंतरराष्ट्रीय कीमतों, निर्यात मांग और भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे।
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