New Rail Project Demand: कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना में बेमेतरा को जोड़ने की मांग, मुंबई-हावड़ा लाइन को मिलेगा नया बायपास

New Rail Project Demand: छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के विस्तार को नई गति मिलने के साथ ही बेमेतरा जिले को रेल सुविधा से जोड़ने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। हाल ही में कटघोरा से डोंगरगढ़ तक लगभग 295 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना को रेल मंत्रालय और राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम के तहत मंजूरी मिली है। इस परियोजना को प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसी बीच क्षेत्र के नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने मांग उठाई है कि इस रेल लाइन का विस्तार कवर्धा से बेमेतरा होते हुए तिल्दा तक किया जाए, ताकि लंबे समय से रेल सुविधा से वंचित बेमेतरा जिले को भी इसका लाभ मिल सके।

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तिल्दा तक रेल लिंक बनाने का प्रस्ताव

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रस्तावित रेल मार्ग को कवर्धा से बेमेतरा होते हुए तिल्दा तक जोड़ा जाता है, तो यह केवल बेमेतरा को पहली बार रेल नेटवर्क से नहीं जोड़ेगा, बल्कि मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग के लिए एक मजबूत वैकल्पिक बायपास भी उपलब्ध कराएगा। तिल्दा से राजनांदगांव के बीच यह नया मार्ग भविष्य में यातायात के दबाव को कम करने और रेल संचालन को अधिक सुगम बनाने में भी उपयोगी साबित हो सकता है।

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पांच दशक पुरानी है बेमेतरा की रेल मांग

बेमेतरा और कवर्धा को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग कोई नई नहीं है। क्षेत्र के लोगों के अनुसार, पिछले लगभग 50 वर्षों से इस दिशा में लगातार प्रयास किए जाते रहे हैं। करीब एक दशक पहले राजनांदगांव से बेमेतरा और कवर्धा होते हुए जबलपुर तक लगभग 430 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस परियोजना के लिए रेलवे ने टोपो इंजीनियरिंग एवं यातायात सर्वेक्षण भी कराया था, जिस पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। हालांकि उस समय संभावित आय कम होने का हवाला देते हुए इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया गया।

अब बदल चुकी हैं औद्योगिक परिस्थितियां

रेलवे द्वारा पहले उद्योगों की कमी को परियोजना स्थगित करने का प्रमुख कारण बताया गया था। लेकिन अब बेमेतरा की परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं। जिला तेजी से औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है। यहां स्पंज आयरन, इथेनॉल और अन्य उद्योग स्थापित हो चुके हैं। इसके अलावा जिले में डोलोमाइट सहित खनिज संसाधनों का उत्पादन भी बढ़ा है। ऐसे में उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों के परिवहन के लिए रेल संपर्क की आवश्यकता पहले की तुलना में कहीं अधिक महसूस की जा रही है।

भौगोलिक दृष्टि से भी आसान माना जा रहा प्रस्ताव

विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि कवर्धा से बेमेतरा होते हुए तिल्दा तक रेल लाइन बिछाने में कोई बड़ी भौगोलिक बाधा नहीं है। प्रस्तावित मार्ग अधिकांशतः मैदानी क्षेत्र से होकर गुजरता है। केवल सिमगा के पास शिवनाथ नदी पर एक बड़े पुल का निर्माण करना होगा। इसके अलावा पूरे मार्ग में पहाड़ी या दुर्गम क्षेत्र नहीं होने के कारण निर्माण लागत भी अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना जताई जा रही है। इस रेल मार्ग से बेमेतरा, कवर्धा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के कई क्षेत्रों को सीधा लाभ मिल सकता है।

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रेल लाइन से उद्योग, रोजगार और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा

यदि यह रेल परियोजना साकार होती है तो जिले के औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है। डोलोमाइट जैसी खनिज संपदा के परिवहन में सुविधा मिलेगी और उद्योगों की लॉजिस्टिक लागत भी कम होगी। इसके अलावा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। कृषि उत्पादों के परिवहन में भी आसानी होगी, जिससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सकते हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

जनप्रतिनिधियों ने भी उठाई है मांग

बेमेतरा को रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग समय-समय पर जनप्रतिनिधियों द्वारा भी उठाई जाती रही है। पूर्व सांसद सरोज पांडे ने अपने कार्यकाल में इस विषय को रेल मंत्रालय के समक्ष रखा था। इसके बाद पूर्व सांसद ताम्रध्वज साहू ने भी संसद में इस मुद्दे को उठाया, लेकिन वित्तीय व्यवहार्यता का हवाला देकर परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया गया। अब बदलती परिस्थितियों के बीच एक बार फिर इस मांग को नए सिरे से जोर मिला है।

यात्रा समय घटाने और वैकल्पिक रेल मार्ग की संभावना

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यदि इस रेल लाइन को जबलपुर की दिशा से भी जोड़ा जाता है, तो रायपुर से जबलपुर की रेल दूरी में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इससे यात्रियों का यात्रा समय लगभग तीन घंटे तक कम होने की संभावना है। साथ ही मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर किसी कारणवश बाधा आने की स्थिति में तिल्दा-बेमेतरा-कवर्धा-राजनांदगांव मार्ग एक प्रभावी वैकल्पिक रेल कॉरिडोर के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

परियोजना में बेमेतरा को शामिल करने की उठी मांग

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने मांग की है कि कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के वर्तमान स्वरूप में संशोधन कर बेमेतरा जिले को भी जोड़ा जाए। उनका कहना है कि वर्तमान औद्योगिक विकास, बढ़ते व्यापार और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को देखते हुए यह परियोजना अब आर्थिक रूप से भी अधिक व्यवहारिक बन चुकी है। यदि समय रहते इस दिशा में निर्णय लिया जाता है, तो बेमेतरा सहित आसपास के कई गांवों और जिलों को लंबे समय से प्रतीक्षित रेल सुविधा का लाभ मिल सकेगा।

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Chandan Das

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