Vande Mataram Row : कर्नाटक के गृह मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने वंदे मातरम के पूरे संस्करण के गायन को लेकर बीजेपी नेताओं बीवाई विजयेंद्र और आर. अशोक को चुनौती दी है। खड़गे ने कहा कि दोनों नेता बिना टेलीप्रॉम्प्टर, मोबाइल फोन या कागज की मदद लिए वंदे मातरम के सभी अंतरे गाकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि यदि दोनों नेता ऐसा करने में सफल होते हैं तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
कर्नाटक सरकार ने पहले दो अंतरे गाने का दिया आदेश
यह विवाद कर्नाटक सरकार के उस आदेश के बाद तेज हुआ है, जिसमें राज्य के सरकारी कार्यक्रमों और आधिकारिक समारोहों में वंदे मातरम गाने या बजाने की व्यवस्था की गई है। आदेश के मुताबिक, सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में गीत के शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाएंगे। हालांकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है।
केंद्र के निर्देश में पूरे संस्करण का जिक्र
केंद्र और कर्नाटक के निर्देशों को लेकर अब राजनीतिक विवाद सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जुलाई 2026 में राज्यों को वंदे मातरम के गायन को लेकर दिशा-निर्देश भेजे थे। जनवरी में जारी केंद्रीय निर्देश के अनुसार, जब वंदे मातरम और राष्ट्रगान दोनों का सामूहिक गायन हो, तब वंदे मातरम के सभी छह अंतरे राष्ट्रगान से पहले गाने की व्यवस्था बताई गई थी।
कांग्रेस ने 1937 के प्रस्ताव का दिया हवाला
कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 19 अगस्त को वंदे मातरम के संबंध में 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया था। पार्टी ने कहा था कि उसके कार्यक्रमों में वंदे मातरम के शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाएंगे। कांग्रेस की यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई, जब बीजेपी की ओर से पार्टी कार्यक्रमों में पूरे गीत के गायन को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच बढ़ा विवाद
वंदे मातरम के गायन को लेकर कर्नाटक में कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए हैं। बीजेपी ने राज्य सरकार के दो अंतरे वाले निर्देश पर आपत्ति जताई है, जबकि कांग्रेस अपने फैसले के समर्थन में ऐतिहासिक प्रस्ताव का हवाला दे रही है। इसी बीच कर्नाटक हाईकोर्ट में राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए एक जनहित याचिका भी दाखिल की गई है।
वंदे मातरम को लेकर नया कानूनी प्रावधान
वंदे मातरम को लेकर 2026 में राष्ट्रीय गौरव से जुड़े कानून में भी बदलाव किया गया। संसद से पारित संशोधन के तहत राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे गायन में बाधा डालना दंडनीय प्रावधानों के दायरे में लाया गया है। इस तरह के अपराध के लिए तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
हाईकोर्ट में भी पहुंचा मामला
कर्नाटक सरकार के दो अंतरे वाले आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका में केंद्र के निर्देशों और राज्य के आदेश के बीच कथित विरोधाभास का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है। अब इस मामले में अदालत की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों और संबंधित सरकारी निर्देशों पर विचार किया जाएगा।
सियासी बयानबाजी के बीच आगे की नजर
प्रियांक खड़गे की चुनौती के बाद वंदे मातरम को लेकर कर्नाटक की राजनीति में बयानबाजी और तेज हो गई है। एक तरफ राज्य सरकार अपने दो अंतरे वाले आदेश पर कायम है, वहीं बीजेपी की ओर से पूरे संस्करण के गायन की मांग की जा रही है। अदालत में मामला पहुंचने के बाद अब इस विवाद का कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले दिनों में सरकार के आदेश और न्यायिक प्रक्रिया से स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
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