Digital Justice CG: छत्तीसगढ़ में न्याय व्यवस्था को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रायपुर में आयोजित “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” राज्य स्तरीय कार्यशाला में सरकार और न्यायपालिका ने मिलकर भविष्य की न्याय प्रणाली का खाका पेश किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा तथा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा सहित न्यायिक, पुलिस और अभियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना था।

तीन साल के भीतर आपराधिक मामलों के निपटारे का लक्ष्य
कार्यशाला के दौरान उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सरकार न्याय व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही देरी को समाप्त करने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में जिला न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक किसी भी आपराधिक मामले के निर्णय में तीन वर्ष से अधिक समय नहीं लगेगा। उनके अनुसार नए तीन आपराधिक कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है, ताकि आम लोगों को वर्षों तक अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें।

मुख्यमंत्री ने नए कानूनों को बताया आधुनिक जरूरतों के अनुरूप
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू किए गए नए आपराधिक कानून देशभर में प्रभावी रूप से लागू किए जा रहे हैं और छत्तीसगढ़ इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि पुलिस, अभियोजन और न्यायिक अधिकारियों को नए कानूनों का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने कानून उस समय बनाए गए थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे। इसलिए बदलते समय और आधुनिक अपराधों की प्रकृति को देखते हुए नए कानूनों की आवश्यकता महसूस की गई।
डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच को मिलेगी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों में डिजिटल एविडेंस को स्पष्ट कानूनी मान्यता दी गई है। अब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन का डेटा, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, ईमेल और अन्य डिजिटल दस्तावेज अपराधों की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक साइंस के बढ़ते उपयोग से जांच प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और सटीक होगी, जिससे दोषियों को सजा दिलाने में आसानी होगी और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
मुख्य न्यायाधीश ने प्रभावी क्रियान्वयन पर दिया जोर
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम न्याय प्रणाली में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि इन कानूनों की सफलता केवल इनके लागू होने में नहीं, बल्कि इनके प्रभावी और ईमानदार क्रियान्वयन में निहित है। उनके अनुसार नई व्यवस्था न्याय प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी, तकनीक आधारित और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाएगी।

ई-साक्ष्य और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बढ़ेगी न्याय प्रक्रिया की गति
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म और डिजिटल फॉरेंसिक जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएंगी। उन्होंने कहा कि ई-साक्ष्य प्रणाली के माध्यम से डिजिटल प्रमाणों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों और हाईकोर्ट में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की गई। इससे समय और संसाधनों की बचत के साथ न्याय प्रक्रिया में तेजी आई है।
तकनीक आधारित न्याय व्यवस्था बनाने की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कार्यशाला के समापन पर कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप न्याय व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल बनाना है। उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों, डिजिटल तकनीक और फॉरेंसिक साइंस के बेहतर उपयोग से आम नागरिकों को तेजी से न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि वर्षों तक चलने वाली “तारीख पर तारीख” की संस्कृति को समाप्त कर समयबद्ध, पारदर्शी और भरोसेमंद न्याय व्यवस्था स्थापित की जाए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डिजिटल जस्टिस का यह मॉडल व्यवहारिक स्तर पर कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ आम लोगों तक न्याय पहुंचाने में सफल होता है।
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