अमेरिका की नई टैरिफ नीति के बाद चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए छह अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने और ड्रोन निर्यात पर नियंत्रण कड़ा करने की घोषणा की है। इस कदम को दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक तनाव के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका की नई टैरिफ नीति के बाद चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए छह अमेरिकी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने और ड्रोन निर्यात पर नियंत्रण कड़ा करने की घोषणा की है। इस कदम को दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक और रणनीतिक तनाव के रूप में देखा जा रहा है।

US-China Trade War : अमेरिका द्वारा हाल ही में लगाए गए प्रतिबंधों के जवाब में चीन ने कई महत्वपूर्ण आर्थिक और व्यापारिक कदम उठाने की घोषणा की है। बुधवार को चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि अब अमेरिका को ड्रोन के निर्यात पर नियंत्रण लगाया जाएगा। इसके साथ ही छह अमेरिकी कंपनियों और संस्थाओं के साथ व्यापारिक गतिविधियों पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया है। चीन का कहना है कि ये कदम अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में उठाए गए हैं और इनका उद्देश्य देश के वैध आर्थिक एवं रणनीतिक हितों की रक्षा करना है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब सितंबर में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की अमेरिका यात्रा की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले मई में बीजिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी चिनफिंग की मुलाकात के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद दिखाई दी थी। हालांकि हाल के प्रतिबंधों और जवाबी कार्रवाइयों ने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव को फिर से बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापार और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के संबंधों को लगातार प्रभावित कर रहे हैं।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि हालिया प्रतिबंध अमेरिका की कई कार्रवाइयों के जवाब में लगाए गए हैं। मंत्रालय के अनुसार अमेरिकी संघीय संचार आयोग (FCC) ने चीनी ड्रोन के आयात पर प्रतिबंध लगाए हैं। इसके अलावा अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग ने ‘उइगर बंधुआ मजदूरी निवारण अधिनियम’ के तहत 43 चीनी कंपनियों को प्रतिबंधित सूची में शामिल किया है। चीन का आरोप है कि इन फैसलों से उसके व्यापारिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचा है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका की हालिया कार्रवाइयां दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण सहमति की भावना के विपरीत हैं। मंत्रालय का कहना है कि इन कदमों से चीन के वैध अधिकारों और हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। बयान में कहा गया कि ऐसी परिस्थितियों में चीन के पास जवाबी कार्रवाई करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा। चीन ने इसे अपनी राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया।
चीन ने अमेरिका से आग्रह किया है कि वह बीजिंग के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों को वापस ले और ऐसी कार्रवाइयों को बंद करे जिन्हें चीन ने अनुचित बताया है। चीनी सरकार ने कहा कि उसने अब तक संयम बरता है, लेकिन यदि अमेरिका भविष्य में भी नए प्रतिबंध लागू करता है, तो चीन भी अतिरिक्त जवाबी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। इस बयान को दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव की नई चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

चीन ने छह अमेरिकी कंपनियों और संस्थाओं के साथ व्यापारिक और अन्य गतिविधियों पर रोक लगाने की घोषणा की है। इनमें ‘एप्लाइड डीएनए साइंसेज इंक’ और गैर-सरकारी संगठन ‘ह्यूमन राइट्स इन चाइना’ भी शामिल हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार अब देश की कंपनियां और संस्थान इन संगठनों के साथ किसी प्रकार का व्यावसायिक सहयोग नहीं कर सकेंगे। हालांकि अन्य प्रभावित संस्थाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि आयातित प्रिंटिंग सॉफ्टवेयर और कार्यालयों में उपयोग होने वाले कुछ उपकरणों की राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से जांच की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि यह मूल्यांकन किया जाएगा कि इन उत्पादों से देश की सुरक्षा पर कोई संभावित खतरा तो नहीं है। हालांकि फिलहाल सरकार ने उन कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, जिनके उत्पाद इस जांच के दायरे में आए हैं।
गौरतलब है कि अमेरिकी संघीय संचार आयोग (FCC) ने दिसंबर में नए चीनी ड्रोन के आयात पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। बाद में कुछ मॉडलों को सीमित मंजूरी देने के लिए नियमों में बदलाव किया गया। इसके अलावा हाल ही में अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए विदेश में निर्मित नए ह्यूमनॉइड रोबोट और पावर इनवर्टर के आयात पर भी प्रतिबंध लगाया था। इन कदमों को मुख्य रूप से चीन को ध्यान में रखकर उठाया गया माना गया था।
चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंधों का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, तकनीकी उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। दोनों देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं, इसलिए इनके बीच बढ़ता तनाव वैश्विक बाजारों पर भी प्रभाव डाल सकता है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच बातचीत और कूटनीतिक प्रयास इस बात पर निर्भर करेंगे कि व्यापारिक विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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