Rajya Sabha : संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बीच कई मुद्दों पर जोरदार बहस हुई। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बहस के कारण सदन का माहौल काफी गर्म हो गया। विपक्ष ने सरकार पर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया।

खरगे बोले- सरकार चर्चा से बच रही है
राज्यसभा में बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष सदन में सभी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ही चर्चा से बच रही है और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर जवाब देने से परहेज कर रही है। खरगे के वक्तव्य के दौरान विपक्षी सांसदों ने भी उनका समर्थन किया और सदन में नारे लगाते हुए मांग की कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर दिया जाए। विपक्ष का कहना था कि लोकतंत्र में विपक्ष की बात सुनना और उसके सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है।

किरेन रिजिजू ने संसदीय नियमों का दिया हवाला
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मल्लिकार्जुन खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष का नेता यह तय नहीं कर सकता कि सरकार की ओर से सदन में कौन-सा मंत्री जवाब देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि विपक्ष किसी मंत्री की उपस्थिति चाहता है तो वह पीठासीन अधिकारी के समक्ष अनुरोध कर सकता है, लेकिन यह निर्णय सरकार का होता है कि किस मंत्री को सदन में भेजा जाए। रिजिजू ने कहा कि संसदीय परंपराओं और नियमों का पालन करना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है।
खरगे ने अपने अधिकारों का किया उल्लेख
किरेन रिजिजू की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सदन में क्या कहना है, कब कहना है और किस विषय पर बोलना है, यह उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि कोई दूसरा सदस्य यह तय नहीं कर सकता कि नेता प्रतिपक्ष को किन मुद्दों पर अपनी बात रखनी चाहिए। खरगे ने यह भी कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने कई नियमों का उल्लेख किया, लेकिन नियम 238A का जिक्र नहीं किया, जो संसद के किसी सदस्य द्वारा दूसरे सदस्य या लोकसभा के सदस्य पर लगाए गए आरोपों से संबंधित प्रावधानों को स्पष्ट करता है।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से बयान की मांग
खरगे ने सदन में दोहराया कि विपक्ष केवल उचित और लोकतांत्रिक सवाल उठा रहा है। उन्होंने कहा कि गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को स्वयं सदन में आकर छात्रों से जुड़े मुद्दों और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर अपना पक्ष रखना चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का नाम लेकर उनका अपमान किया गया, जिसे विपक्ष ने अनुचित बताया।

गतिरोध बरकरार, राजनीतिक बयानबाजी तेज
राज्यसभा में हुई इस बहस के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और अधिक स्पष्ट दिखाई दिया। विपक्ष लगातार महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार संसदीय प्रक्रिया और नियमों के अनुसार कार्यवाही चलाने की बात कह रही है। दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं, जिसके कारण संसद का गतिरोध फिलहाल समाप्त होता नहीं दिख रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में भी संसद के मानसून सत्र के दौरान ऐसे तीखे राजनीतिक मुकाबले देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि विपक्ष कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाए हुए है, जबकि सरकार अपने पक्ष को संसदीय नियमों के आधार पर मजबूती से रखने का प्रयास कर रही है।
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