PoK News : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले लगभग दो महीनों से लगातार विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। शुरुआत स्थानीय मुद्दों से हुई इस आंदोलन ने अब व्यापक राजनीतिक रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारी बिजली की बढ़ती दरों, गेहूं पर सब्सिडी, स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और क्षेत्र में इस्लामाबाद के बढ़ते हस्तक्षेप का विरोध कर रहे हैं। समय के साथ आंदोलन में चुनावी सुधार, स्थानीय अधिकारों की बहाली और प्रशासनिक स्वायत्तता जैसी मांगें भी प्रमुख रूप से शामिल हो गई हैं। लगातार जारी प्रदर्शनों ने पाकिस्तान सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।

विदेशी लॉबी के जरिए नैरेटिव बनाने का आरोप
रिपोर्टों में एक अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि बचाने के लिए अपने विदेशी लॉबी नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है। आरोप है कि जिन समूहों और व्यक्तियों का लंबे समय से कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने के लिए उपयोग किया जाता रहा है, अब उन्हें PoK में जारी प्रदर्शनों और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान हटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अधिकारी का कहना है कि यह पूरी कवायद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की आलोचना को सीमित करने के उद्देश्य से की जा रही है।

जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में जारी आंदोलन
PoK में चल रहे इस आंदोलन का नेतृत्व जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी कर रही है। बताया जाता है कि पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध भी लगा दिया है। इसके बावजूद प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। आंदोलनकारी लगातार सड़कों पर उतरकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। उनका कहना है कि स्थानीय जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय प्रशासन दमनात्मक कार्रवाई कर रहा है।
मानवाधिकार उल्लंघन के गंभीर आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान के सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर ध्यान देने की अपील की है। दावा किया गया है कि आंदोलन शुरू होने के बाद से करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोगों को कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि मोबाइल संचार और इंटरनेट सेवाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे वास्तविक स्थिति की जानकारी बाहर आने में कठिनाई हो रही है।
सूचना पर नियंत्रण रखने की कोशिश के आरोप
अधिकारी के अनुसार, पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र यह नहीं चाहता कि देश के भीतर या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर PoK की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी सामने आए। आरोप है कि संचार माध्यमों पर नियंत्रण और सूचना के प्रवाह को सीमित करने का उद्देश्य प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़ी खबरों को नियंत्रित करना है। इसी वजह से घटनाओं से संबंधित कई सूचनाएं सीमित रूप में ही सामने आ रही हैं।

भारत विरोधी अभियान जारी रखने का भी दावा
इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान हाल के वर्षों में विदेशों में अपने पक्ष में माहौल तैयार करने के लिए लगातार निवेश कर रहा है। अधिकारी का दावा है कि इस रणनीति का एक उद्देश्य कश्मीर मुद्दे पर भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना भी है। साथ ही विदेशी सांसदों और नीति निर्माताओं के बीच पाकिस्तान की सकारात्मक छवि प्रस्तुत करने की कोशिश की जा रही है ताकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक और कूटनीतिक समर्थन मिल सके।
आतंकी संगठनों से ध्यान हटाने के भी आरोप
रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि कुछ समूहों को लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों की गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाने का काम सौंपा गया है। अधिकारी के अनुसार, शीर्ष पाकिस्तानी अधिकारियों और इन समूहों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। साथ ही निर्देश दिए जा रहे हैं कि PoK के अलावा बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे अशांत क्षेत्रों की घटनाओं को भी वैश्विक सुर्खियों से दूर रखा जाए।
चीन के निवेश और वैश्विक छवि की चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान पर चीन का भी दबाव बना हुआ है क्योंकि उसने देश में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। विशेष रूप से बलूचिस्तान में चीन समर्थित परियोजनाओं पर पिछले कुछ वर्षों में कई हमले हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि इन घटनाओं और PoK की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक ध्यान गया, तो पाकिस्तान की निवेश सुरक्षा क्षमता और वैश्विक छवि पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता केवल आंतरिक स्थिति संभालना ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि को भी नुकसान से बचाना है।
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