US Iran Tension: ईरान से टकराव के बीच ट्रंप का बड़ा फैसला, परमाणु डील पर बदलेगा रुख?

US Iran Tension:  अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब संघर्ष से बाहर निकलने का रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच फरवरी के आखिरी सप्ताह से शुरू हुआ सैन्य तनाव लगातार जारी है और फिलहाल किसी भी पक्ष के पीछे हटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इसी बीच वॉशिंगटन की ओर से संभावित कूटनीतिक समाधान पर विचार किया जा रहा है।

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परमाणु समझौते से पहले होर्मुज पर फोकस

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन फिलहाल ईरान के साथ औपचारिक परमाणु समझौते की बजाय होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने वाले समझौते को प्राथमिकता दे सकता है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगर ईरान होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर देता है, तो ट्रंप प्रशासन परमाणु मुद्दे को फिलहाल पीछे रखकर इसे अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकता है।

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बिना न्यूक्लियर डील पीछे हट सकते हैं ट्रंप

रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने इस संभावित रणनीति पर कई सप्ताह तक विचार-विमर्श किया है। उन्होंने अपने वरिष्ठ सहयोगियों को कथित तौर पर संकेत दिया है कि अमेरिका औपचारिक परमाणु समझौता किए बिना भी सैन्य टकराव से पीछे हट सकता है। हालांकि, इस विकल्प के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान की वे शर्तें हैं, जिन्हें तेहरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सामान्य जहाज यातायात बहाल करने के लिए रखा है।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखी कई मांगें

ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने के बदले कई बड़ी रियायतों की मांग की गई है। इनमें अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करना, क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की वापसी और ईरान के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। इसके अलावा तेहरान ने वित्तीय संसाधनों को मुक्त करने और युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे जैसी मांगें भी सामने रखी हैं।

स्थायी युद्धविराम की मांग

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाकर जोलघद्र ने भी होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर ईरान की शर्तें स्पष्ट की हैं। ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, उन्होंने अमेरिका से युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की मांग की है। इसके साथ ही अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने और क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों को वापस बुलाने की शर्त भी रखी गई है।

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प्रतिबंध और जमे हुए फंड जारी करने की मांग

तेहरान की मांगों में ईरान के खिलाफ लगाए गए सभी प्रतिबंधों को समाप्त करना भी शामिल है। इसके अलावा ईरान ने विदेशों में फ्रीज किए गए अपने वित्तीय संसाधनों को जारी करने की मांग की है। ईरानी पक्ष ने मुआवजे के साथ-साथ अमेरिका की ओर से ईरान को दी जाने वाली सैन्य धमकियों और सैन्य कार्रवाइयों को पूरी तरह रोकने की बात भी कही है।

क्षेत्रीय समूहों के खिलाफ कार्रवाई रोकने की शर्त

ईरान ने अमेरिका से अपने सहयोगी क्षेत्रीय समूहों के खिलाफ सैन्य या अन्य कार्रवाई रोकने की मांग भी रखी है। इन शर्तों के चलते दोनों देशों के बीच संभावित समझौते का रास्ता आसान नहीं दिख रहा है। अमेरिका जहां होर्मुज स्ट्रेट को खोलने को अहम उपलब्धि के तौर पर देख सकता है, वहीं ईरान व्यापक सुरक्षा और आर्थिक रियायतें चाहता है।

UAE के टैंकर पर हमले का दावा

इसी बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव और बढ़ गया है। संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे अबू धाबी के एक वाणिज्यिक टैंकर को ईरान ने निशाना बनाया। यूएई के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, जहाज के स्ट्रेट से गुजरने के दौरान उस पर हमला किया गया और कथित तौर पर मिसाइल दागी गई।

हमले में क्रू के हताहत होने की खबर नहीं

यूएई के दावे के अनुसार, टैंकर पर हमले के बावजूद जहाज में मौजूद क्रू सदस्यों के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की कोशिशों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।

कूटनीतिक समाधान की राह मुश्किल

अमेरिका अगर परमाणु समझौते के बजाय होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर समझौता करता है, तो इसे संघर्ष से बाहर निकलने की रणनीति के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन ईरान की व्यापक मांगों को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच सहमति बनना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ट्रंप प्रशासन ईरान की शर्तों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है और क्या दोनों देश सैन्य टकराव को समाप्त करने के लिए किसी समझौते तक पहुंच पाते हैं।

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Chandan Das

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