Delhi Court Election News : चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच दिल्ली की एक अदालत ने चुनावी अनियमितताओं से संबंधित शिकायत पर पुलिस को नए सिरे से कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। यह शिकायत वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा ने चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई थी। अदालत ने पुलिस की ओर से पहले प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में कुछ कमियां पाईं और जांच अधिकारी को शिकायत तथा संबंधित दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा करने को कहा।
महमूद प्राचा ने लगाए थे कई आरोप
महमूद प्राचा ने वर्ष 2025 में दाखिल शिकायत में आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग के कुछ अधिकारियों ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों की 2023 की हैंडबुक में निर्धारित प्रावधानों का पालन नहीं किया। शिकायत में दिल्ली समेत कुछ राज्यों में कथित फर्जी मतदान को सुविधा देने और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से नियमों के विपरीत हटाए जाने जैसे आरोप लगाए गए थे। इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होना है।
पुलिस की कार्रवाई रिपोर्ट पर कोर्ट ने जताई आपत्ति
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कौतुक भारद्वाज ने पुलिस की ओर से दाखिल कार्रवाई रिपोर्ट पर विचार किया। शिकायतकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले उन्हें अपने साक्ष्य प्रस्तुत करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। इसके बाद अदालत ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गौर करते हुए रिपोर्ट को दोबारा तैयार करने का निर्देश दिया।
शिकायतकर्ता से पूछताछ को बताया जरूरी
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की प्रारंभिक जांच या उससे पूछताछ किए बिना कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल नहीं की जानी चाहिए थी। कोर्ट ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह महमूद प्राचा की शिकायत के साथ उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए संबंधित दस्तावेजों की भी जांच करें। इसके बाद सभी तथ्यों और उपलब्ध सामग्री पर विचार करते हुए नई कार्रवाई रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की जाए।
11 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली की अदालत ने पुलिस को मामले से जुड़े दस्तावेजों और शिकायत की दोबारा जांच करने के बाद नई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 नवंबर को निर्धारित की गई है। अदालत के ताजा निर्देश के बाद पुलिस की जांच और उसके आधार पर तैयार होने वाली नई रिपोर्ट पर नजर रहेगी।
चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा
इसी बीच चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट ने भी राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में इन आपत्तियों को विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों के संदर्भ में बताया गया है।
रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने उठाए सवाल
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों के कई नेताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कुछ विपक्षी नेताओं ने उनके इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर, आयोग से जुड़े विवाद पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि आयोग से जुड़े आरोपों और रिपोर्ट में किए गए दावों पर संबंधित पक्षों के जवाब को ध्यान में रखना जरूरी है।
चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची पर बहस जारी
मौजूदा विवाद में एक ओर दिल्ली अदालत के सामने लंबित शिकायत और पुलिस की जांच है, जबकि दूसरी ओर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को लेकर सार्वजनिक बहस चल रही है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, संधू और जोशी ने आयोग के फैसलों को लेकर कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में भी न्यायिक और सार्वजनिक चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।
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