Gautam Adani News: भारत के प्रमुख उद्योगपति और एशिया के सबसे बड़े रईसों में शामिल गौतम अडानी को अमेरिका में चल रहे आपराधिक मामले में बड़ी राहत मिली है। एक अमेरिकी अदालत ने अडानी के खिलाफ लगाए गए आपराधिक आरोपों को खारिज कर दिया है। यह मामला अमेरिकी निवेशकों को कथित तौर पर धोखा देने और भारत में सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट से जुड़े ठेके हासिल करने के लिए सरकारी अधिकारियों को कथित रिश्वत देने के आरोपों से जुड़ा था।

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने केस आगे नहीं बढ़ाया
मामले में अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने पहले ही संकेत दिया था कि वह इस आपराधिक केस को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। विभाग की ओर से केस वापस लेने की अपील के बाद अदालत की मंजूरी जरूरी थी। सोमवार को अमेरिकी जज ने मामले की समीक्षा करने के बाद अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोपों को खारिज करने की अनुमति दे दी। इससे अडानी के लिए अमेरिका में चल रही इस कानूनी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।

अडानी ने फैसले का किया स्वागत
अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अडानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अदालत के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि कानूनी लड़ाई के दौरान उनका सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में विश्वास कायम रहा। अडानी ने न्यायिक प्रक्रिया के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उन लोगों का भी आभार जताया, जिन्होंने इस कठिन दौर में उनके कारोबारी समूह, कानूनी व्यवस्था और भारत की क्षमताओं पर भरोसा बनाए रखा।
देश के लिए काम जारी रखने की बात कही
अडानी ने अपने बयान में कहा कि उनका समूह भविष्य में भी देश के लिए निर्माण और दीर्घकालिक मूल्य सृजन पर ध्यान केंद्रित करता रहेगा। उन्होंने संकेत दिया कि मुश्किल कानूनी परिस्थितियों के बावजूद समूह का उद्देश्य अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाना है। अडानी ने कहा कि उनका कमिटमेंट ऐसे काम करने का है, जिनका प्रभाव लंबे समय तक बना रहे और जो व्यक्तिगत हितों से आगे किसी बड़े उद्देश्य की पूर्ति करें।
जज ने जस्टिस डिपार्टमेंट से मांगी थी जानकारी
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन स्थित संघीय अदालत के जज ने केस वापस लेने की सरकार की अपील पर अतिरिक्त जानकारी मांगी थी। इसके बाद फेडरल प्रॉसिक्यूटर्स की ओर से मामले को आगे नहीं बढ़ाने के अनुरोध को मंजूरी दी गई। जस्टिस डिपार्टमेंट का तर्क था कि यह मामला मुख्य रूप से विदेशी गतिविधियों से संबंधित था, आरोपों को अदालत में साबित करना कठिन हो सकता था और यह विभाग की मौजूदा प्राथमिकताओं के अनुरूप नहीं था।

आरोप खारिज करने के लिए न्यायिक मंजूरी जरूरी
अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया के तहत केवल अभियोजन पक्ष के अनुरोध से आपराधिक आरोप औपचारिक रूप से खत्म नहीं किए जा सकते। इस मामले में न्यायिक मंजूरी आवश्यक थी। सुनवाई के दौरान जज ने यह सवाल भी उठाया कि क्या आरोपों को खत्म करने के बदले अडानी पक्ष के साथ किसी तरह का समझौता या कोई अन्य वादा किया गया था। अदालत ने मामले की परिस्थितियों को समझने के लिए संबंधित पक्षों से जानकारी मांगी।
अडानी ने किसी समझौते से अनजान होने की बात कही
15 जुलाई को दाखिल किए गए एक शपथ-पत्र में गौतम अडानी ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें आरोप वापस लेने के बदले किसी विशेष समझौते या वादे की जानकारी नहीं थी। इस बयान के जरिए उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि मामले को समाप्त करने के लिए उनके और अमेरिकी सरकार के बीच किसी विशेष डील की जानकारी उन्हें नहीं थी।
अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश का वादा
मामले की सुनवाई के दौरान अमेरिका में निवेश को लेकर भी चर्चा हुई। अडानी ने स्वीकार किया कि उन्होंने पहले अमेरिका में करीब 10 अरब डॉलर निवेश करने की बात कही थी। उनके अनुसार, उनके वकीलों ने अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट को बताया था कि यह निवेश प्रतिबद्धता संभावित रूप से मामले के समाधान से जुड़ी हो सकती है। हालांकि, बाद में इस संबंध में अमेरिकी सरकार की ओर से अलग रुख सामने आया।
निवेश को समझौते का हिस्सा नहीं माना गया
अडानी के वकीलों के मुताबिक, जस्टिस डिपार्टमेंट ने उन्हें बताया था कि अडानी समूह की अमेरिका में निवेश करने की इच्छा को किसी भी संभावित समझौते का हिस्सा नहीं माना जाएगा। यानी अमेरिका में निवेश की योजना और आपराधिक मामले को खत्म करने की प्रक्रिया को अलग-अलग रखा गया। अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा भी चर्चा का हिस्सा बना।
2024 में लगाए गए थे गंभीर आरोप
गौतम अडानी और उनके समूह से जुड़े अधिकारियों पर वर्ष 2024 में अमेरिका में गंभीर आरोप लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि अडानी ने अडानी समूह की एक सहायक कंपनी से जुड़े सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए आवश्यक मंजूरी हासिल करने के उद्देश्य से भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर सहमति जताई थी। इसके अलावा अमेरिकी निवेशकों को समूह की भ्रष्टाचार-रोधी नीतियों और संबंधित गतिविधियों के बारे में कथित तौर पर गुमराह करने के आरोप भी लगाए गए थे।
अडानी समूह ने आरोपों से किया था इनकार
अडानी समूह ने शुरुआत से ही इन आरोपों को खारिज किया था। समूह की ओर से कहा गया था कि लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और कंपनी ने किसी भी तरह की गलत गतिविधि में शामिल होने से इनकार किया था। अब अमेरिकी अदालत द्वारा आपराधिक आरोपों को खारिज किए जाने के बाद इस मामले में अडानी समूह को महत्वपूर्ण कानूनी राहत मिली है।
फैसले के बाद आगे की राह पर नजर
अमेरिकी अदालत के फैसले को अडानी समूह के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। मामले में जस्टिस डिपार्टमेंट की ओर से केस आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय और अदालत की मंजूरी दोनों महत्वपूर्ण रहे। वहीं, अडानी ने इस फैसले के बाद कानून और न्यायिक प्रक्रिया में अपने विश्वास को दोहराया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इस घटनाक्रम का अडानी समूह के अंतरराष्ट्रीय कारोबार, अमेरिका में निवेश योजनाओं और वैश्विक निवेशकों के भरोसे पर आगे क्या असर पड़ता है।
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