Saroj Pandey High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बीजेपी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय से बैंक खाते की जानकारी से जुड़े एक आवेदन पर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। यह मामला उनके वर्ष 2018 के राज्यसभा निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा है। कांग्रेस के तत्कालीन प्रत्याशी लेखराम साहू ने आरोप लगाया है कि सरोज पांडेय ने चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथपत्र में अपने एक बैंक खाते की जानकारी कथित तौर पर छिपाई थी।

2018 के राज्यसभा चुनाव को दी गई चुनौती
छत्तीसगढ़ में मार्च 2018 में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव हुआ था। इस चुनाव में बीजेपी ने सरोज पांडेय को उम्मीदवार बनाया था, जबकि कांग्रेस की ओर से लेखराम साहू मैदान में थे। चुनाव प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी ने सरोज पांडेय के नामांकन पत्र और चुनावी हलफनामे में दर्ज जानकारियों को लेकर आपत्ति जताई थी। इसके बाद यह विवाद न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया।

शपथपत्र में जानकारी छिपाने का आरोप
लेखराम साहू का मुख्य आरोप है कि सरोज पांडेय ने निर्वाचन आयोग को दिए गए हलफनामे में महत्वपूर्ण बैंक खाते का विवरण नहीं दिया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में मौजूद एक खाते की जानकारी शपथपत्र में शामिल नहीं की गई। इसी आरोप को लेकर अब बैंक खाते से संबंधित रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश कराने की मांग की गई है।
निर्वाचन अधिकारी ने खारिज की थी आपत्तियां
चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी की ओर से सरोज पांडेय के नामांकन और हलफनामे पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, तत्कालीन निर्वाचन अधिकारी ने इन आपत्तियों को स्वीकार नहीं किया और उन्हें खारिज कर दिया था। बाद में यह विवाद केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्यपाल के स्तर तक भी पहुंचा। इसके बावजूद चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ी और मतदान के बाद सरोज पांडेय को विजेता घोषित किया गया।
चुनाव परिणाम के बाद हाईकोर्ट पहुंचे लेखराम साहू
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद पराजित कांग्रेस प्रत्याशी लेखराम साहू ने सरोज पांडेय के निर्वाचन को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिका में कथित तौर पर गलत या अधूरी जानकारी देने के अलावा कुछ विधायकों को मतदान की अनुमति दिए जाने को भी आधार बनाया गया है। यह चुनाव याचिका लंबे समय से अदालत में लंबित है और इस पर समय-समय पर सुनवाई होती रही है।

बैंक खाते की जानकारी को लेकर नया विवाद
मामले में बैंक खाते से संबंधित जानकारी अब सुनवाई का प्रमुख हिस्सा बन गई है। लेखराम साहू का आरोप है कि वर्ष 2018 के राज्यसभा चुनाव के समय सरोज पांडेय ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में मौजूद एक खाते का उल्लेख अपने हलफनामे में नहीं किया था। याचिकाकर्ता इस खाते से जुड़े दस्तावेज अदालत में पेश कराकर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं।
बैंक अधिकारी ने डेटा देने से किया था इनकार
याचिकाकर्ता की ओर से यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी जनरल मैनेजर को गवाह के रूप में अदालत में पेश होने का आदेश दिए जाने की मांग की गई थी। हालांकि, बैंक अधिकारी ने ‘थर्ड पार्टी इंफॉर्मेशन’ का हवाला देते हुए संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया था। दूसरी ओर, RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी में कथित बैंक खाते के अस्तित्व को पूरी तरह नकारा नहीं गया है।
सरोज पांडेय ने गवाही देने से किया इनकार
मामले में सरोज पांडेय की ओर से पहले ही हाईकोर्ट को बताया जा चुका है कि वह स्वयं गवाह के तौर पर पेश नहीं होंगी। 12 अगस्त 2026 की सुनवाई के दौरान लेखराम साहू के अधिवक्ताओं ने अदालत के सामने कहा कि सरोज पांडेय ने खुद गवाही देने से इनकार किया है। ऐसे में उनके खिलाफ क्रॉस-एग्जामिनेशन की प्रक्रिया संभव नहीं हो पा रही है।
बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट का सहारा
याचिकाकर्ता के वकीलों के अनुसार, अब कथित बैंक खाते की वास्तविक जानकारी सामने लाने के लिए ‘बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट, 1891’ की धारा 6 का सहारा लिया जा सकता है। इस प्रावधान के तहत अदालत के पास संबंधित बैंक से खाते के रिकॉर्ड मंगाने और उन्हें साक्ष्य के तौर पर न्यायिक रिकॉर्ड में शामिल करने का अधिकार होता है।
हाईकोर्ट के अगले कदम पर नजर
बुधवार को हुई सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरोज पांडेय को बैंक खाते की जानकारी से जुड़े आवेदन पर दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब मामले में आगे की सुनवाई उनके जवाब के बाद होगी। इस पूरे प्रकरण में बैंक खाते से जुड़े रिकॉर्ड और चुनावी हलफनामे की जानकारी अहम हो सकती है। फिलहाल हाईकोर्ट के अगले आदेश पर सभी की नजर बनी हुई है।
Read More : Rajnandgaon ED Raid: भंसाली और नाहटा समूह पर ED की नजर, राजनांदगांव में कई जगह छापेमारी











