Trump Plane Switch: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तुर्किये यात्रा से जुड़ी एक घटना इन दिनों ईरान के सरकारी मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चर्चा का विषय बनी हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले महीने तुर्किये से अमेरिका लौटते समय ट्रंप ने एयरफोर्स वन के बजाय एक छोटे सैन्य विमान से यात्रा की थी। इस बदलाव को कथित सुरक्षा खतरे से जोड़कर देखा जा रहा है। ईरानी मीडिया ने इस घटनाक्रम को लेकर ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए कई मीम्स भी प्रसारित किए हैं।

ईरानी मीडिया ने ट्रंप पर कसा तंज
ईरान के सरकारी मीडिया और सोशल मीडिया पर ट्रंप के विमान बदलने को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। वहां दावा किया गया कि विमान बदलने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति की ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर चिंता को दर्शाता है। ईरान के दक्षिण अफ्रीका स्थित दूतावास के एक्स अकाउंट से भी एक मीम साझा किया गया, जिसमें ट्रंप को खाने के सामान से भरे कैटरिंग बॉक्स के भीतर छिपा हुआ दिखाया गया।

‘कूड़ेदान में छिपने’ वाला मीम हुआ वायरल
ईरानी दूतावास की ओर से साझा किए गए मीम में ट्रंप पर व्यंग्य करते हुए कहा गया कि जल्द ही उन्हें कूड़ेदान में छिपना पड़ सकता है। यह तंज उस कथित कैटरिंग ट्रक से जुड़ा था, जिसका इस्तेमाल ट्रंप को एयरपोर्ट पर बिना सार्वजनिक जानकारी के दूसरे विमान तक पहुंचाने के लिए किया गया था। इस पोस्ट के जरिए ईरान ने अमेरिकी सुरक्षा व्यवस्था और ट्रंप की यात्रा योजना पर राजनीतिक कटाक्ष किया।
विमान बदलने के पीछे क्या थी वजह?
रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप के विमान को लेकर अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों के सामने संभावित खतरे की आशंका थी। अधिकारियों को कथित तौर पर डर था कि तुर्किये से रवाना होने वाले विमान को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल से निशाना बनाया जा सकता है। इस संभावित खतरे का संबंध ईरान या ईरान समर्थित किसी संगठन से होने की आशंका जताई गई थी। इसी कारण राष्ट्रपति की सुरक्षा योजना में अचानक बदलाव किया गया।
सीक्रेट सर्विस ने तैयार की गोपनीय योजना
अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने ट्रंप की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बेहद गोपनीय तरीके से वैकल्पिक योजना तैयार की। योजना के तहत ट्रंप को एक छोटे और कम पहचान वाले C-32A सैन्य विमान में स्थानांतरित किया गया। वहीं, एयरफोर्स वन को भी उसी दिशा में रवाना किया गया, ताकि संभावित हमलावरों को यह पता न चल सके कि राष्ट्रपति वास्तव में किस विमान में मौजूद हैं।

एयरफोर्स वन बना डिकॉय विमान
इस सुरक्षा रणनीति में एयरफोर्स वन ने एक तरह के डिकॉय विमान की भूमिका निभाई। सार्वजनिक तौर पर ट्रंप को एयरफोर्स वन की ओर जाते हुए दिखाया गया था। इसके बाद उन्हें एक एयरपोर्ट कैटरिंग ट्रक के जरिए चुपचाप दूसरे विमान तक पहुंचाया गया। दूसरी ओर एयरफोर्स वन अपनी निर्धारित दिशा में उड़ान भरता रहा, जिससे राष्ट्रपति की वास्तविक स्थिति छिपी रहे।
पत्रकार और अधिकारी एयरफोर्स वन में रहे
रिपोर्टों के मुताबिक, एयरफोर्स वन में वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी, व्हाइट हाउस के कर्मचारी और पत्रकारों का प्रेस पूल मौजूद था। विमान के अलग से रवाना होने का उद्देश्य यही था कि राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को लेकर भ्रम बना रहे। इस तरह सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित खतरे की स्थिति में ट्रंप की लोकेशन को गोपनीय रखने की कोशिश की।
नाटो शिखर सम्मेलन के बाद बदली योजना
यह पूरा मामला तुर्किये की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के बाद का बताया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप को 8 जुलाई को तुर्किये से रवाना होना था और शुरुआत में उनके लिए एयरफोर्स वन से यात्रा की योजना थी। लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा अधिकारियों को कथित ईरानी खतरे की जानकारी मिलने के बाद यात्रा की योजना बदल दी गई।
सुरक्षा खतरे को लेकर अमेरिका सतर्क
अमेरिकी अधिकारियों ने कथित खतरे को गंभीरता से लेते हुए राष्ट्रपति की यात्रा व्यवस्था में अंतिम समय पर बदलाव किया। हालांकि, इस सुरक्षा योजना से जुड़ी कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। विमान बदलने की घटना सामने आने के बाद ईरान ने इसे अमेरिकी नेतृत्व की कमजोरी के रूप में पेश करने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका की ओर से इसे राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए उठाया गया एहतियाती कदम माना जा रहा है।
ट्रंप की सुरक्षा पर उठी नई चर्चा
विमान बदलने की घटना ने अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। वहीं, ईरानी मीडिया और सोशल मीडिया पर इसे अमेरिका-ईरान तनाव के संदर्भ में प्रचारित किया जा रहा है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कथित खतरे की प्रकृति कितनी गंभीर थी, लेकिन घटना ने दोनों देशों के बीच जारी तनाव को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
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