Vande Mataram Row: केरल यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर मोहनन कुन्नुम्मल के एक बयान को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को उन्होंने राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर अपनी राय रखी। मणिविला में आयोजित आरएसएस के युवा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम्’ नहीं गाते या इसका उच्चारण नहीं करते, वे अपनी मां को पहचानने का भाव नहीं समझते।


भारत माता को बताया देश की मां
अपने संबोधन में मोहनन कुन्नुम्मल ने भारत माता और परिवार के बीच संबंध का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत माता ने ही बच्चों को उनके माता-पिता तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि देश के बच्चों को जिम्मेदार और योग्य नागरिक बनाने में परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उनके मुताबिक, घर के पुरुष और महिला दोनों की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें देश के निर्माण के लिए तैयार करें।

बच्चों के विकास में मां की भूमिका पर जोर
वीसी ने अपने भाषण में विशेष रूप से मां की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत को ‘भारत माता’ कहने के पीछे मातृत्व की भावना जुड़ी हुई है। उनके अनुसार, जिस तरह मां अपने बच्चों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, उसी तरह देश भी नागरिकों के लिए मां के समान है। इसी भावना के साथ लोग ‘वंदे मातरम्’ का उद्घोष करते हैं।
वंदे मातरम् का विरोध करने वालों पर टिप्पणी
मोहनन कुन्नुम्मल ने आगे कहा कि जो लोग ‘वंदे मातरम्’ गाने से इनकार करते हैं या इसका विरोध करते हैं, वे मां के भाव और उसके महत्व को नहीं समझते। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जो लोग मां का अर्थ और उसके प्रति सम्मान की भावना को समझते हैं, वे राष्ट्रगीत का सम्मान करेंगे और ‘वंदे मातरम्’ का गायन करेंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक और छात्र संगठनों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
SFI और KSU ने लगाए गंभीर आरोप
वीसी के बयान के बाद छात्र संगठनों ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। SFI और KSU ने आरोप लगाया कि मोहनन कुन्नुम्मल केरल यूनिवर्सिटी में आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। छात्र संगठनों ने उनके सार्वजनिक बयानों और गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय को राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित करने के बजाय शैक्षणिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

LDF और UDF ने नियुक्ति पर उठाए सवाल
केरल के प्रमुख राजनीतिक गठबंधनों LDF और UDF ने भी मोहनन कुन्नुम्मल की नियुक्ति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्यपाल द्वारा उन्हें वाइस चांसलर नियुक्त किए जाने के बाद से विश्वविद्यालय के कामकाज और उनके बयानों को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। दोनों गठबंधनों ने इस पूरे घटनाक्रम को शिक्षा क्षेत्र से जोड़ते हुए सरकार और राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
विपक्ष ने लगाया शिक्षा के भगवाकरण का आरोप
LDF और UDF ने मोहनन कुन्नुम्मल पर केरल की शिक्षा व्यवस्था में कथित तौर पर ‘भगवाकरण’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि विश्वविद्यालयों को राजनीतिक विचारधारा का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर वीसी की ओर से अलग से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी नहीं है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर भी विवाद
इस विवाद के बीच केरल में स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज है। विपक्षी पक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का गायन नहीं किया गया। इसी मुद्दे को लेकर पहले से चल रही राजनीतिक बहस के बीच वीसी का बयान सामने आने से विवाद और गहरा गया है।
बयान के बाद बढ़ी सियासी हलचल
मोहनन कुन्नुम्मल के बयान ने राष्ट्रगीत, देशभक्ति और शिक्षा संस्थानों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर उनके समर्थक इसे राष्ट्र और मातृभूमि के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति के तौर पर देख सकते हैं, जबकि विपक्षी दल और छात्र संगठन इसे राजनीतिक विचारधारा से जोड़कर सवाल उठा रहे हैं। फिलहाल, बयान को लेकर केरल की राजनीति और विश्वविद्यालय परिसर में चर्चा तेज है।
Read More : CG Corruption: आय से 1049 गुना अधिक संपत्ति वाले बाबू को 4 साल की कैद, ₹5 हजार जुर्माना












