मशहूर अभिनेता Mukesh Khanna एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में आ गए हैं। 15 अगस्त को देशभर में 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, इसी दौरान अभिनेता ने भारत के राष्ट्रगान को लेकर अपनी राय सामने रखी। उन्होंने ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाए जाने की मांग की है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाने की मांग
मुकेश खन्ना ने समाचार एजेंसी IANS से बातचीत के दौरान राष्ट्रगान से जुड़े अपने विचार विस्तार से रखे। अभिनेता ने कहा कि वह पहले भी ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाए जाने की बात कह चुके हैं। उनका कहना है कि ‘वंदे मातरम’ देश की भावना और संस्कृति से अधिक गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में बदलाव पर विचार करने की अपील भी की।
‘जन गण मन’ को लेकर अभिनेता ने किया दावा
बातचीत के दौरान मुकेश खन्ना ने ‘जन गण मन’ के इतिहास को लेकर कई दावे किए। उन्होंने कहा कि यह गीत ब्रिटिश शासन के दौर में तत्कालीन शाही सत्ता के सम्मान में लिखा गया था और इसे महारानी एलिजाबेथ से जोड़कर अपनी बात रखी। हालांकि, राष्ट्रगान के इतिहास को लेकर अभिनेता के इस दावे पर विवाद हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश ने इसे लंबे समय से राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया हुआ है, लेकिन उनके विचार में ‘वंदे मातरम’ को यह दर्जा मिलना चाहिए।
‘भाग्यविधाता’ और ‘पंजाब सिंध’ पर भी सवाल
मुकेश खन्ना ने अपने बयान में ‘जन गण मन’ के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द भारतीय पहचान और भावना से उतने जुड़े हुए नहीं हैं। उन्होंने ‘भाग्यविधाता’ और ‘पंजाब सिंध’ जैसे शब्दों का उदाहरण देते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारतीय संस्कृति और देश की भावनाओं का ज्यादा बेहतर प्रतिनिधित्व करता है। अभिनेता ने अपने विचारों को राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया।
मोदी सरकार से बदलाव की अपील
अभिनेता ने केंद्र की मोदी सरकार से भी इस मुद्दे पर कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि देशभर में ‘जन गण मन’ की जगह ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि यह बदलाव जल्द से जल्द हो। हालांकि, राष्ट्रगान में बदलाव एक संवैधानिक और आधिकारिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय है, इसलिए इस तरह की मांग पर व्यापक सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा की आवश्यकता होगी।
स्कूलों और कार्यक्रमों में अनिवार्य करने की मांग
मुकेश खन्ना ने केवल राष्ट्रगान बदलने की मांग तक अपनी बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने कहा कि देशभर के स्कूलों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य किया जाना चाहिए। अभिनेता के मुताबिक, इसे पूरा गाया जाना चाहिए और इसके महत्व को नई पीढ़ी तक पहुंचाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत को लेकर लोगों के बीच जागरूकता और सम्मान की भावना बढ़नी चाहिए।
‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण पर जोर
मुकेश खन्ना ने बातचीत में ‘वंदे मातरम’ के पूरे संस्करण का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गीत के कुछ हिस्सों को बाद में अलग कर दिया गया था और वह चाहते हैं कि इसकी मूल भावना और महत्व को समझा जाए। अभिनेता ने बताया कि उन्होंने खुद ‘वंदे मातरम’ का करीब सात मिनट का एक संस्करण रिकॉर्ड किया है, जिसे वह ऐतिहासिक बनाने की इच्छा रखते हैं।
पहले भी उठा चुके हैं यह मुद्दा
मुकेश खन्ना ने दावा किया कि उन्होंने करीब तीन साल पहले भी ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान बनाए जाने की मांग की थी। अब स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एक बार फिर उन्होंने इस मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया है। उनके बयान के बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के बीच अंतर, उनके ऐतिहासिक महत्व और आधिकारिक दर्जे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
बयान पर आगे बढ़ सकती है बहस
मुकेश खन्ना का बयान ऐसे समय सामने आया है जब देश में ‘वंदे मातरम’ को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर पहले से चर्चा चल रही है। अभिनेता की मांग से इस बहस को एक नया आयाम मिल गया है। अब देखना होगा कि उनके बयान पर राजनीतिक दलों, इतिहासकारों और आम लोगों की क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल अभिनेता ने अपनी राय स्पष्ट करते हुए ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान का दर्जा देने की मांग दोहराई है।
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