Hormuz Strait Row: ट्रंप के दावे पर भड़का ईरान, बोला- भ्रम जल्द दूर कर देंगे

डोनाल्ड ट्रंप के एक पोस्ट ने ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को फिर बढ़ा दिया है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र बताने वाला नक्शा साझा किया। इसके बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे भ्रम बताया और कहा कि इस दावे की सच्चाई जल्द दुनिया के सामने स्पष्ट होगी।

Hormuz Strait Row: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई एक AI-जनरेटेड तस्वीर ने विवाद को और हवा दे दी है। तस्वीर में होर्मुज जलडमरूमध्य को कथित तौर पर “NEW U.S. Territory” के रूप में दर्शाया गया। ईरान ने ट्रंप के इस दावे को खारिज करते हुए इसे वास्तविकता से दूर बताया है और चेतावनी दी है कि उनका यह भ्रम जल्द दूर हो जाएगा।

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ईरानी उप विदेश मंत्री ने ट्रंप पर साधा निशाना

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रंप की पोस्ट का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने “शाश्वत फारस की खाड़ी” का नाम सही लिखा है, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उनका भ्रम जल्द खत्म हो जाएगा। गरीबाबादी ने संकेत दिया कि यह भ्रम परिस्थितियों के कारण दूर हो सकता है या फिर ईरान स्वयं इसे खत्म करने के लिए कदम उठा सकता है। उनके बयान से दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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ट्रंप ने साझा की AI से बनी विवादित तस्वीर

डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी AI-जनरेटेड तस्वीर साझा की। तस्वीर में रणनीतिक समुद्री मार्ग को नीले रंग में दिखाया गया था और उसके आसपास “NEW U.S. Territory” लिखा हुआ था। यह पोस्ट ऐसे वक्त सामने आई, जब ट्रंप लगातार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण को लेकर बयान दे रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका का इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर “पूरी तरह नियंत्रण” है।

ट्रंप ने अमेरिकी नियंत्रण को बताया फायदेमंद

ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है और तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह क्षेत्र अमेरिकी नियंत्रण में है तो इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का विचार उन्हें पसंद आता है। उनके इन बयानों के बाद ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। तेहरान ने साफ संकेत दिया कि वह जलडमरूमध्य को लेकर किसी भी अमेरिकी दावे को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

ईरान ने अमेरिकी क्षमता और दावे पर उठाए सवाल

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के नवनियुक्त प्रमुख मोहसिन रजाई ने भी ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने की अमेरिका की क्षमता और इसे अपना क्षेत्र बताने के दावे में बड़ा अंतर है। रजाई के मुताबिक, वॉशिंगटन और होर्मुज के बीच करीब 7,000 मील से अधिक की दूरी है, लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण अंतर अमेरिका की वास्तविक क्षमता और उसके दावों के बीच है।

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ईरान ने जलडमरूमध्य खोलने के लिए रखीं शर्तें

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से कुछ शर्तें पूरी किए जाने तक जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने का फैसला नहीं किया जाएगा। ईरान की मांगों में कथित नाकाबंदी हटाना, फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी करना और तेल प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। इसके अलावा समझौते से जुड़े अन्य वादों को पूरा करने की मांग भी की गई है।

सैन्य और कूटनीतिक रणनीति पर ईरान का जोर

गालिबफ ने यह भी कहा कि ईरान अपनी सैन्य और कूटनीतिक रणनीति को साथ लेकर आगे बढ़ेगा। उनका संकेत है कि तेहरान किसी भी कथित उल्लंघन का जवाब देने के लिए तैयार है। ऐसे बयानों से साफ है कि होर्मुज जलडमरूमध्य केवल एक समुद्री मार्ग का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक रणनीतिक तनाव का केंद्र बन चुका है।

वैश्विक ऊर्जा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है होर्मुज

होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस कारण यहां किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकता है। खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ने की आशंका रहती है।

बढ़े तनाव से तेल और शिपिंग पर असर संभव

यदि अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज को लेकर तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन प्रभावित हो सकते हैं। जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बाधा से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदमों पर टिकी हुई है।

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Chandan Das

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