Painted Stork News: दिल्ली के चिड़ियाघर में हर साल आने वाले खूबसूरत प्रवासी पक्षी पेंटेड स्टॉर्क यानी रंगीन सारस का आगमन शुरू हो गया है। 5-6 अगस्त से ये पक्षी छोटे-छोटे समूहों में चिड़ियाघर पहुंच रहे हैं। भोजन और प्रजनन के लिए हिमालय की तलहटी वाले क्षेत्रों से आने वाले ये जलीय पक्षी हर साल दिल्ली के चिड़ियाघर के साथ-साथ ओखला बर्ड सेंचुरी और भरतपुर नेशनल पार्क जैसे प्रमुख स्थलों का रुख करते हैं। इनके आने से इन क्षेत्रों में पक्षी प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।
बीट नंबर-12 के तालाबों पर बनाते हैं अपनी कॉलोनी
दिल्ली चिड़ियाघर में पेंटेड स्टॉर्क के लिए बीट नंबर-12 के दो तालाब बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। हर साल प्रवास के दौरान पक्षी इसी क्षेत्र के पेड़ों पर अपनी कॉलोनी बनाकर घोंसले तैयार करते हैं। इस बार भी इनके धीरे-धीरे पहुंचने का सिलसिला जारी है। फिलहाल इन पक्षियों ने करीब 100 घोंसले तैयार कर लिए हैं। वन्यजीव विभाग को उम्मीद है कि अगस्त के अंत तक यहां पेंटेड स्टॉर्क के करीब 400 घोंसले दिखाई दे सकते हैं।
घोंसलों में जल्द सुनाई देगी चूजों की चहचहाहट
पेंटेड स्टॉर्क के लिए यह समय सिर्फ प्रवास का नहीं, बल्कि प्रजनन का भी महत्वपूर्ण चरण होता है। तैयार किए जा रहे घोंसलों में आने वाले समय में इनके चूजे जन्म लेंगे। जानकारी के अनुसार ये प्रवासी पक्षी लगभग पांच महीने तक इस क्षेत्र में रह सकते हैं। इस दौरान चिड़ियाघर के तालाब और आसपास के पेड़ इन पक्षियों की गतिविधियों से गुलजार रहेंगे। चूजों के जन्म के बाद कॉलोनी में पक्षियों की संख्या और हलचल और बढ़ने की उम्मीद है।
जिस पेड़ पर घोंसला बनाया, उसे नहीं भूलते सारस
वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट डॉ. परितोष अहमद के अनुसार पेंटेड स्टॉर्क की एक खास आदत होती है। ये पक्षी जिस पेड़ और स्थान पर एक बार घोंसला बनाते हैं, अगले प्रजनन मौसम में उसी जगह लौटने की कोशिश करते हैं। यानी इनके लिए पुराना घोंसला स्थल सिर्फ एक स्थान नहीं, बल्कि परिचित आवास होता है। पिछले कुछ वर्षों के अवलोकन में भी इस व्यवहार के लगातार प्रमाण सामने आए हैं।
चोट के निशान वाले पक्षी से मिला अहम सुराग
डॉ. परितोष अहमद ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से एक ऐसे पेंटेड स्टॉर्क की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है, जिसके पंख के पास चोट के कारण रिंग जैसा निशान बना हुआ है। हर सीजन में उसकी गतिविधियों का अध्ययन किया गया। इस दौरान पाया गया कि वह पक्षी लगातार उसी पेड़ की उसी डाल के आसपास घोंसला बनाने के लिए लौटता रहा। इससे इन पक्षियों की अपने पुराने घोंसले वाले स्थान के प्रति मजबूत निष्ठा का पता चलता है।
शोध में सामने आया ‘नेस्ट-साइट फिडेलिटी’ का व्यवहार
साल 2026 में प्रकाशित एक शोध ने भी पेंटेड स्टॉर्क में ‘नेस्ट-साइट फिडेलिटी’ यानी बार-बार उसी स्थान पर घोंसला बनाने की प्रवृत्ति के वैज्ञानिक प्रमाण दिए हैं। दिल्ली चिड़ियाघर में ‘रिंगो’ नाम से पहचाने गए एक नर पेंटेड स्टॉर्क का 2022 से 2025 तक अध्ययन किया गया। शोध के दौरान पाया गया कि वह लगातार उसी पेड़ और लगभग उसी स्थान पर घोंसला बनाता रहा।
AI तकनीक से पक्षी की पहचान में मिली मदद
डॉ. परितोष अहमद समेत शोधकर्ताओं की टीम ने इस अध्ययन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की मदद से पक्षी की पहचान और उसकी गतिविधियों का विश्लेषण किया। लगातार कई वर्षों तक एक ही पक्षी के व्यवहार पर नजर रखने से यह समझने में मदद मिली कि पेंटेड स्टॉर्क अपने प्रजनन स्थल को कितनी मजबूती से याद रखते हैं। दिल्ली चिड़ियाघर में इन प्रवासी पक्षियों का लौटना अब न सिर्फ प्राकृतिक आकर्षण, बल्कि वैज्ञानिक अध्ययन का भी महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
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