CG High Court POCSO Case : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने POCSO से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपी युवक को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कथित अपराध के समय शिकायतकर्ता नाबालिग थी, तो बाद में आरोपी से उसकी शादी हो जाने और दोनों के साथ रहने मात्र से POCSO के तहत दर्ज आपराधिक मामला समाप्त नहीं हो जाता। कोर्ट ने आरोपी की FIR, चार्जशीट और संज्ञान आदेश रद्द करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी।
चीफ जस्टिस की बेंच ने सुनाया फैसला
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। याचिकाकर्ता नवल किशोर आदित्य ने अदालत से अपने खिलाफ दर्ज FIR, पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट और विशेष POCSO अदालत के संज्ञान आदेश को रद्द करने की मांग की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
जांजगीर-चांपा जिले से जुड़ा है मामला
पूरा मामला जांजगीर-चांपा जिले का है। नवल किशोर आदित्य के खिलाफ महिला थाने में 22 अप्रैल 2026 को मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दिए अपने बयान में आरोप लगाया था कि वह वर्ष 2011 से आरोपी के संपर्क में थी। आरोप के मुताबिक, आरोपी ने उससे शादी करने का वादा किया और इसी भरोसे पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।
शादी का वादा कर संबंध बनाने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आरोपी लगातार शादी का भरोसा देता रहा, लेकिन बाद में परिवार से जुड़ी परिस्थितियों का हवाला देकर विवाह को टालता रहा। इस बीच दोनों के बीच संपर्क बना रहा। बाद में 20 अप्रैल 2026 को दोनों ने शादी कर ली। हालांकि शादी के बाद भी पहले से दर्ज आपराधिक मामले की पुलिस जांच जारी रही।
पुलिस ने जांच के बाद दाखिल की चार्जशीट
पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद 16 जून 2026 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। इसके कुछ दिनों बाद 19 जून को विशेष POCSO अदालत ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए पूरी आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करने की मांग की।
आरोपी ने शादी को बनाया राहत का आधार
हाईकोर्ट में आरोपी की ओर से दलील दी गई कि शिकायतकर्ता और वह लंबे समय से एक-दूसरे को जानते हैं और अब दोनों ने विवाह भी कर लिया है। आरोपी की ओर से यह भी बताया गया कि शिकायतकर्ता ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने बयान में मामले को गलतफहमी का परिणाम बताया था और आगे कानूनी कार्रवाई नहीं चाहने की बात कही थी। इसी आधार पर FIR और आगे की कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई।
राज्य सरकार ने याचिका का किया विरोध
राज्य सरकार ने आरोपी की दलीलों का विरोध किया। सरकार की ओर से कहा गया कि कथित अपराध के समय शिकायतकर्ता नाबालिग थी। ऐसे में बाद में दोनों का विवाह कर लेना या साथ रहना POCSO कानून के तहत बने अपराध को समाप्त करने का आधार नहीं हो सकता। सरकार ने कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया अपराध बनता है, इसलिए शुरुआती चरण में पूरी आपराधिक प्रक्रिया को खत्म करना उचित नहीं होगा।
हाईकोर्ट ने कहा, पहली नजर में अपराध बनता है
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले के रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध सामने आता है। अदालत ने कहा कि बाद में हुई शादी और दोनों के साथ रहने की स्थिति मामले की परिस्थितियों में देखी जा सकती है, लेकिन केवल इसी आधार पर आपराधिक कार्यवाही को शुरुआती चरण में समाप्त नहीं किया जा सकता।
BNSS के तहत मिनी ट्रायल नहीं किया जा सकता
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 528 BNSS के तहत याचिका पर विचार करते समय हाईकोर्ट विवादित तथ्यों और साक्ष्यों की विस्तृत जांच करके मिनी ट्रायल नहीं कर सकता। इस स्तर पर अदालत को यह देखना होता है कि रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया अपराध बनता है या नहीं। इस मामले में अदालत को कार्यवाही समाप्त करने का पर्याप्त आधार नहीं मिला।
FIR और चार्जशीट रद्द करने से इनकार
हाईकोर्ट ने माना कि FIR, चार्जशीट और विशेष POCSO अदालत के संज्ञान आदेश को रद्द करने का कोई उचित आधार मौजूद नहीं है। इसी के साथ नवल किशोर आदित्य की याचिका खारिज कर दी गई। अदालत के इस आदेश के बाद मामले की आपराधिक कार्यवाही आगे जारी रहेगी और संबंधित अदालत में कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई होगी।
शादी से अपने आप खत्म नहीं होता POCSO मामला
इस फैसले का अहम संदेश यह है कि कथित अपराध के समय यदि शिकायतकर्ता नाबालिग थी, तो बाद में आरोपी के साथ विवाह हो जाना अपने आप POCSO के तहत शुरू हुई आपराधिक कार्यवाही को खत्म नहीं करता। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इसी कानूनी पहलू को ध्यान में रखते हुए आरोपी को राहत देने से इनकार किया है।
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