JPSC-JSSC Protest: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितता और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहा छात्रों का आंदोलन बुधवार को 26वें दिन दो महीने के लिए स्थगित कर दिया गया। राजधानी रांची के जयपाल मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में छात्र और युवा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जुटे थे। इसी बीच JPSC-JSSC Reform Manch ने सरकार की ओर से कई प्रमुख मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन को फिलहाल रोकने का ऐलान किया। हालांकि, जिन परीक्षाओं पर अभी फैसला नहीं हुआ है, उन्हें रद्द कराने की मांग जारी रखने की बात मंच ने कही है।
छात्रों के संघर्ष के बाद सरकार ने मानी कई मांगें
मंच के प्रतिनिधि रविंद्र पासवान ने कहा कि लगातार 26 दिनों तक चले छात्रों के संघर्ष का असर सरकार पर पड़ा है। उनके मुताबिक, राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को छात्रों की कई प्रमुख मांगों पर फैसला लेना पड़ा। आंदोलन की मुख्य मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच शामिल थी।
करीब 22 परीक्षाओं को रद्द करने का दावा
रविंद्र पासवान के अनुसार, सरकार ने आंदोलन के बाद करीब 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया है। इनमें CGL सहित TDPL के माध्यम से आयोजित कुछ परीक्षाएं और JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा भी शामिल हैं। मंच ने इन फैसलों को आंदोलनरत छात्रों की बड़ी उपलब्धि बताया। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह परिणाम लंबे समय तक चले शांतिपूर्ण संघर्ष और छात्रों की एकजुटता से संभव हुआ है।
कई परीक्षाओं पर अभी भी फैसला बाकी
हालांकि मंच ने स्पष्ट किया कि सभी विवादित परीक्षाओं को लेकर अभी समाधान नहीं हुआ है। PGT, नगर पालिका और लैब टेक्नीशियन समेत कई परीक्षाओं में भी कथित गड़बड़ी और अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं। छात्रों की मांग है कि इन परीक्षाओं को भी रद्द किया जाए और पूरी प्रक्रिया की जांच कराकर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाए।
JSSC कार्यालय की कार्रवाई का भी किया जिक्र
रविंद्र पासवान ने आंदोलन के दौरान हुई प्रशासनिक कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान JSSC कार्यालय में छापेमारी हुई और सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ की गई। उनके अनुसार, सरकार ने सभी मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया, लेकिन कई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला जरूर किया। मंच का दावा है कि सरकार ने परीक्षा माफिया और अनियमितताओं में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दो महीने का समय मांगा है।
सरकार को दिया दो महीने का समय
इसी आधार पर JPSC-JSSC Reform Manch ने आंदोलन को पूरी तरह खत्म करने के बजाय दो महीने के लिए स्थगित करने का फैसला लिया है। मंच का कहना है कि इस अवधि में सरकार से बाकी मांगों पर ठोस कार्रवाई की उम्मीद है। दो महीने बाद सरकार के कदमों की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो फिर शुरू होगा आंदोलन
छात्र प्रवक्ता पीयूष कुमार सिंह ने कहा कि मंच भविष्य में भी छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर दो महीने के भीतर लंबित मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगली बार आंदोलन को पहले से अधिक व्यापक स्तर पर ले जाने की तैयारी होगी।
राजनीतिक दलों के सहयोग के लिए जताया आभार
पीयूष कुमार सिंह ने आंदोलन के दौरान समर्थन देने वाले सत्ता पक्ष, विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC Reform Manch पीछे हटने वाला नहीं है और किसी भी छात्र के साथ अन्याय होने की स्थिति में मंच उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
भूख हड़ताल ने आंदोलन को दी अतिरिक्त मजबूती
इस आंदोलन के दौरान सविता, राहुल क्रांति और रूपेश ने भूख हड़ताल कर छात्रों की मांगों को मजबूती दी थी। बाद में सविता का अनशन समाप्त कराया गया। अब मंच ने संकेत दिया है कि दो महीने बाद सरकार के कामकाज और लंबित मांगों की स्थिति की समीक्षा होगी। यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई, तो झारखंड में छात्र आंदोलन एक बार फिर जोर पकड़ सकता है।
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