Vande Mataram Row: राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC के प्रस्ताव के बाद अब बीजेपी ने इस मुद्दे पर तीखा पलटवार किया है। तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस के फैसले पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस के रुख को राष्ट्रविरोधी बताते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने 1937 के अपने पुराने निर्णय को दोहराकर एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने की कोशिश की है।
1937 के प्रस्ताव को लेकर शाह ने साधा निशाना
अमित शाह ने कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी ने 1937 में अपनाए गए रुख का अनुसरण करते हुए वंदे मातरम् के केवल दो अंतरों को गाने का फैसला किया है। शाह के अनुसार, उस समय कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के तहत राष्ट्रगीत को सीमित करने का फैसला लिया था। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का मौजूदा निर्णय उसी राजनीतिक सोच की पुनरावृत्ति है।
कांग्रेस के फैसले को बताया तुष्टिकरण की राजनीति
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का वंदे मातरम् को लेकर लिया गया फैसला तुष्टिकरण की राजनीति का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में इस तरह के राजनीतिक निर्णयों के दूरगामी परिणाम सामने आए हैं। शाह के मुताबिक, 1937 में वंदे मातरम् को लेकर लिए गए निर्णय को आगे चलकर देश के विभाजन से जुड़ी परिस्थितियों के संदर्भ में देखा गया। उन्होंने कांग्रेस पर उसी पुराने दृष्टिकोण को फिर से सामने लाने का आरोप लगाया।
मोदी सरकार ने गलती सुधारने का किया दावा
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने कांग्रेस के पुराने निर्णय को सुधारने की दिशा में कदम उठाए हैं। उनके मुताबिक, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और वंदे मातरम् के सम्मान को सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचा तैयार किया गया है। शाह ने दावा किया कि सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय प्रतीकों को लेकर देश में एक समान भावना को मजबूत करना है।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना का किया जिक्र
वंदे मातरम् को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में अमित शाह ने इसके ऐतिहासिक महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के फैसले से बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की ऐतिहासिक रचना का अपमान होता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले लोगों की भावनाओं का भी उल्लेख किया।
स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान का मुद्दा उठाया
गृह मंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् ने आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों में देशभक्ति और संघर्ष की भावना को मजबूत किया था। ऐसे में राष्ट्रगीत को लेकर लिया गया कोई भी राजनीतिक फैसला स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ी भावनाओं को प्रभावित कर सकता है। शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के मौजूदा रुख से उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का भी अपमान होता है, जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन बलिदान किया।
संसद के कानून को लेकर भी सवाल
अमित शाह ने कांग्रेस पर संसद द्वारा बनाए गए कानून को स्वीकार नहीं करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ कांग्रेस अपने पुराने प्रस्ताव को लागू करने की दिशा में बढ़ रही है, जबकि दूसरी ओर संसद से जुड़े कानूनी प्रावधानों को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। शाह ने इसे कांग्रेस की मौजूदा राजनीतिक दिशा से जोड़ते हुए पार्टी नेतृत्व पर भी निशाना साधा।
राहुल गांधी के नेतृत्व पर भी हमला
गृह मंत्री ने कांग्रेस की वर्तमान राजनीति को राहुल गांधी के नेतृत्व से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि पार्टी एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी इस तरह की राजनीति का विरोध करती है। शाह के बयान के बाद वंदे मातरम् का मुद्दा केवल राष्ट्रगीत से जुड़ा विषय न रहकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच व्यापक वैचारिक बहस का हिस्सा बन गया है।
लोगों से कांग्रेस के फैसले का विरोध करने की अपील
अमित शाह ने देशवासियों से कांग्रेस के फैसले के खिलाफ एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब देश में तुष्टिकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। बीजेपी की ओर से कांग्रेस के CWC प्रस्ताव की कड़ी निंदा की गई है। शाह ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि राष्ट्रहित और राष्ट्रीय एकता के मुद्दों पर किसी प्रकार का राजनीतिक समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
राष्ट्रीय प्रतीकों पर फिर तेज हुई सियासत
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच शुरू हुआ नया विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब राष्ट्रीय प्रतीकों, राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस में बने हुए हैं। दोनों दल अपने-अपने रुख को जनता के सामने रख रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बयानबाजी और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।
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