Dengue Goat Milk: बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा होने के कारण मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ जाता है। इनमें एडीज मच्छर डेंगू वायरस फैलाने का प्रमुख माध्यम है। संक्रमित मच्छर के काटने से डेंगू हो सकता है, जिसमें तेज बुखार, शरीर में दर्द, कमजोरी, सिरदर्द और कई मामलों में प्लेटलेट्स कम होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। डेंगू के इलाज के दौरान लोग कई घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय भी अपनाते हैं। इनमें बकरी के दूध का सेवन काफी चर्चित है।
क्या बकरी का दूध डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाता है?
डेंगू के मरीजों के बीच यह धारणा लंबे समय से प्रचलित है कि बकरी का दूध पीने से प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं। आयुर्वेदिक डॉक्टर चंचल शर्मा के अनुसार, आयुर्वेद में बकरी के दूध को ‘छाग पय’ कहा गया है और इसे पौष्टिक माना जाता है। हालांकि, बकरी के दूध को डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने वाली प्रमाणित चिकित्सा मानना सही नहीं है। वैज्ञानिक शोधों में अभी तक ऐसा ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि इसके सेवन से डेंगू मरीजों का प्लेटलेट काउंट तेजी से बढ़ता है।
आयुर्वेद में बकरी के दूध का क्या महत्व है?
आयुर्वेदिक ग्रंथों में बकरी के दूध का उल्लेख विभिन्न स्वास्थ्य स्थितियों में किया गया है। चरक संहिता के राजयक्ष्मा चिकित्सा अध्याय में इसे कमजोरी और कुछ विशेष रोगों में उपयोगी बताया गया है। पारंपरिक चिकित्सा में इसे शरीर को पोषण देने और ताकत बढ़ाने वाले आहार के रूप में देखा जाता है। हालांकि, किसी प्राचीन चिकित्सा संदर्भ को सीधे डेंगू के आधुनिक उपचार का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
बकरी का दूध आसानी से पचने वाला माना जाता है
बकरी के दूध की एक विशेषता यह बताई जाती है कि यह कुछ लोगों को गाय के दूध की तुलना में अपेक्षाकृत आसानी से पच सकता है। इसमें मौजूद वसा के कण छोटे होते हैं, जिसके कारण इसे हल्का माना जाता है। बीमारी के दौरान जब मरीज को कमजोरी महसूस होती है, तब पौष्टिक और आसानी से पचने वाला भोजन शरीर को ऊर्जा देने में मदद कर सकता है। हालांकि, हर मरीज की पाचन क्षमता अलग होती है।
पोषक तत्वों से शरीर को मिल सकती है ऊर्जा
बकरी के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनमें से कई पोषक तत्व शरीर की सामान्य जरूरतों को पूरा करने और हड्डियों के स्वास्थ्य में योगदान देते हैं। इसमें मौजूद कुछ खनिज और फैटी एसिड शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं। इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा माना जा सकता है, लेकिन इसे डेंगू की दवा या प्लेटलेट बढ़ाने वाला उपचार समझना उचित नहीं होगा।
रिसर्च में प्लेटलेट बढ़ने का दावा साबित नहीं
डेंगू के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या बकरी का दूध प्लेटलेट्स बढ़ाता है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इस दावे की पुष्टि नहीं करते। डेंगू में प्लेटलेट्स का स्तर बीमारी के दौरान स्वाभाविक रूप से ऊपर-नीचे हो सकता है। इसलिए केवल प्लेटलेट काउंट बढ़ाने के उद्देश्य से बकरी का दूध पीना वैज्ञानिक उपचार का विकल्प नहीं है। मरीज को डॉक्टर की निगरानी और आवश्यक जांच कराते रहना चाहिए।
कच्चे बकरी के दूध से संक्रमण का खतरा
विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चा या बिना पाश्चराइज्ड बकरी का दूध पीना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे दूध में बैक्टीरिया मौजूद होने की आशंका रहती है और इससे ब्रुसेलोसिस जैसे संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए यदि बकरी का दूध लिया जा रहा है तो उसे अच्छी तरह उबालकर या सुरक्षित तरीके से पाश्चराइज्ड रूप में लेना बेहतर है।
डेंगू में डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी
डेंगू के दौरान पर्याप्त तरल पदार्थ लेना, आराम करना और चिकित्सक द्वारा बताई गई दवाओं का सेवन करना महत्वपूर्ण है। तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, खून आना, अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बकरी का दूध पौष्टिक आहार हो सकता है, लेकिन इसे डेंगू का इलाज या प्लेटलेट बढ़ाने का वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
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