Assam Meghalaya Border Tension : असम और मेघालय की सीमा पर गुरुवार को तनावपूर्ण स्थिति बन गई। गुवाहाटी के टैक्सी चालकों और स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (NH-27) पर वाहनों की आवाजाही रोककर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि शिलॉन्ग में खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) की रैली के दौरान असम के लोगों और वाहनों को निशाना बनाया गया। कथित हिंसक घटनाओं के विरोध में चालकों ने सड़क पर नाकेबंदी शुरू कर दी।
जोराबाट में मेघालय नंबर की गाड़ियों को रोका
असम के जोराबाट इलाके में टूरिस्ट ड्राइवरों और स्थानीय लोगों ने मेघालय नंबर वाली गाड़ियों को रोकना शुरू कर दिया। नाकेबंदी के कारण दोनों राज्यों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने ज्यादातर वाहनों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। हालांकि, मरीजों को लेकर गुवाहाटी की ओर जाने वाले वाहनों को इस रोक से छूट दी गई, ताकि आपात स्थिति में इलाज प्रभावित न हो।
मेघालय के संगठनों ने भी लगाया जवाबी जाम
जोराबाट में असम की ओर से मेघालय जाने वाले वाहनों को रोके जाने के बाद मेघालय में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। परिवहन संगठनों ने असम नंबर के वाहनों की आवाजाही रोकने का फैसला किया। AKMTTA की ओर से उमियम यानी बारापानी के पास वाहनों को रोकने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा FKJGP ने बर्नीहाट क्षेत्र में नाकेबंदी कर असम से मेघालय में प्रवेश करने वाले वाहनों को रोक दिया।
आमने-सामने आईं दोनों राज्यों की सड़कें
शिलॉन्ग में हुई कथित हिंसा के विरोध से शुरू हुआ विवाद अब दोनों राज्यों के वाहन चालकों और संगठनों के बीच जवाबी कार्रवाई में बदल गया है। एक राज्य में वाहनों को रोकने के बाद दूसरे राज्य में भी इसी तरह की नाकेबंदी की जा रही है। इसका सीधा असर सीमावर्ती क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था पर पड़ा है। कई यात्रियों और पर्यटकों को रास्ते में रुकना पड़ा, जबकि जरूरी काम से यात्रा करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं।
मरीजों और पर्यटकों को सबसे ज्यादा परेशानी
नाकेबंदी के कारण कई ऐसे लोग भी प्रभावित हुए, जिन्हें इलाज या जरूरी काम के लिए सीमा पार जाना था। एक पर्यटक ने बताया कि वह होटल में ठहरने के लिए पहुंचा, लेकिन उसे कमरा देने से इनकार कर दिया गया। उसने यह भी कहा कि वह अपने पिता के इलाज के लिए NEIGRIHMS अस्पताल नहीं पहुंच पा रहा है। ऐसी स्थिति ने यात्रियों की चिंता और बढ़ा दी है।
KSU की पांच प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
विवाद की पृष्ठभूमि में खासी स्टूडेंट्स यूनियन का आंदोलन बताया जा रहा है। संगठन लंबे समय से अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठा रहा है। इनमें मेघालय निवासी सुरक्षा और संरक्षा कानून यानी MRSSA को तत्काल लागू करने की मांग प्रमुख है। संगठन का कहना है कि स्थानीय लोगों के हितों और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग
KSU की दूसरी प्रमुख मांग राज्य लोक सेवा आयोग (MPSC) और जिला चयन समितियों (DSCs) की भर्ती प्रक्रिया में सुधार से जुड़ी है। संगठन भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और स्थानीय युवाओं के हितों को सुनिश्चित करने की मांग कर रहा है। इसके अलावा बाहरी राज्यों से आने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए कड़े नियम बनाए जाने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।
NEIGRIHMS और खनन परियोजना का मुद्दा
यूनियन ने NEIGRIHMS अस्पताल में नर्सों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की भी मांग रखी है। इसके साथ ही ईस्ट जयंतिया हिल्स के लम सिरमन क्षेत्र में श्री सीमेंट की प्रस्तावित खदान को लेकर हुई जनसुनवाई रद्द करने की मांग भी शामिल है। इन मुद्दों को लेकर संगठन सरकार पर कार्रवाई का दबाव बना रहा है। फिलहाल दोनों राज्यों में वाहनों की नाकेबंदी से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
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